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Tuesday, August 3, 2021

पंचायतों में चल रहा फर्जी बिलों का खेल, जिम्मेदार कर रहे अनदेखी...

 



रेवांचल टाईम्स - सरपंच-सचिव व रोजगार सहायक रिश्तेदारों व संबंधियों के नाम फर्में बनाकर मनरेगा व पंच परमेश्वर योजना का पैसा हड़प रहे हैं! जबकि राज्य शासन के नए प्रावधान के तहत सरपंच-सचिव अपने पति, पत्नी, पुत्र व रिश्तेदारों की सप्लायर फर्मों के नाम भुगतान नहीं कर सकते। लेकिन सिवनी जिले की अधिकांश पंचायतों में यह कार्य धड़ल्ले से हो रहा है। बावजूद इसके इस क्षेत्र में स्थानीय प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है।


मालूम हो कि नवंबर 2015 से पहले पंच-परमेश्वर एवं मनरेगा योजना के तहत ग्राम पंचायत क्षेत्र में किए जाने वाले निर्माण कार्य का भुगतान सरपंच-सचिव चैक के माध्यम से सप्लायर फर्म को किया करते थे। सरपंच-सचिव ने इस प्रावधान का लाभ उठाते हुए अपने पुत्र, पति, पत्नी व अन्य संबंधियों के नाम फर्में बनाकर सरकारी भुगतान हड़पना शुरू कर दिया। लेकिन यह मामला संज्ञान में आते ही राज्य शासन ने प्रावधान में बदलाव कर दिया। जिसके तहत सरपंच-सचिव एवं रोजगार सहायक के रिश्तेदार व पति,पत्नी,पुत्र,  के नाम की सप्लायर फर्म को मनरेगा व पंचपरमेश्वर योजना के तहत भुगतान नहीं हो सकता है। इस पर लगाम करने के लिए लिए राज्य शासन ने प्रदेश के प्रत्येक जनपद सीईओ को निर्देश भी जारी किए, लेकिन अफसरशाही  के चलते शासन के नियम को ताक पर रखकर सरपंच-सचिव व रोजगार सहायकों के परिजन के नाम सप्लायर फर्म को शासन की योजनाओं का भुगतान किया जा रहा है।


सिवनी जिले की सभी जनपद पंचायत नियमों को ताक पर रखकर फर्मो को भुगतान कर रही है।


इसलिए बनाई जा रही संबंधियों के नाम फर्में

संबंधी के नाम फर्म बनाने से सरपंच-सचिव उपयंत्री से सांठगांठ कर मनरेगा एवं पंच-परमेश्वर के तहत कराए गए निर्माण कार्य में हुई सप्लाई का न केवल भुगतान करा लेते हैं, बल्कि जरूरत के मुताबिक सामग्री भी क्रय नहीं करते। संबंधियों द्वारा फर्जी बिल तैयार कराकर शासन को चूना लगाया जा रहा है।


सप्लायर को अब इस तरह किया जाएगा भुगतान

नए प्रावधान के तहत अब मनरेगा योजना के तहत फर्म का भुगतान तब किया जाएगा, जब सप्लाई के बाद निर्माण कार्य पूरा हो जाता है। भुगतान से पहले सरपंच-सचिव व उपयंत्री को निर्माण कार्य वेरीफिकेशन कर जनपद के नरेगा सेक्शन में देना होता है। इसके बाद सप्लायर फर्म के खाते में राशि पहुंच जाती है।


पंच-परमेश्वर योजना के तहत फर्म का भुगतान सामग्री सप्लाई के बाद निर्माण पूरा होने पर होता है। लेकिन इससे पहले निर्धारित फार्म पर जानकारी देनी होती है। इसके बाद बैंक के माध्यम से आरटीजीएस (राइट टाइम ग्रोस सेटलमेंट) सिस्टम के जरिए सप्लायर फर्म के एकाउंट में पहुंच जाता है।


विनोद दुबे के साथ रेवांचल टाईम्स की रिपोर्ट

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