रेवांचल टाईम्स - गोंडवाना साम्राज्य का ह्रदय गढ़ा मंडला के विकास खण्ड नारायणगंज अंतर्गत ग्राम पंचायत सिवनी माल नर्मदा तट के तीर बसा यह गांव दोनों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ प्राकृतिक सौंदर्य का छटा बिखरेता हुआ अपने अनोखे सौंदर्य के लिए हमेशा सराहा जाता है। जहां गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति मध्य प्रदेश के तत्वाधान में प्रदेश स्तरीय भोजली महोत्सव का आयोजन किया गया जहां पर लगभग 8 जिलों से भोजली माताएं भोजली लेकर पहुंची स्थानीय समिति के जिला सचिव तिरू.झुन्नी सैयाम द्वारा पर्व की विशेषताओं के बारे में बताया गया की 551 भोजली इस महोत्सव में शामिल हुए। सावन पूर्णिमा के 7 दिन पूर्व अपने घरों में सात प्रकार की बीजों का उपयोग कर भोजली बोया जाता है 7 दिन सेवा करने के पश्चात पूर्णिमा के दिन भोजली महोत्सव का आयोजन होता है। जहां पर सब अपने-अपने भोजली लेकर पहुंचते हैं। भोजलि पूजन पश्चात इन्हें मां नर्मदा तट पर सरवर स्नान कराया गया। पश्चात सभी माताएं अपने अपने भोजली अपने घर लेकर जाते हैं। गोंडी धर्म संस्कृति रीति नीति को जीवित रखने का निरंतर पहल करने वाले गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति मध्य प्रदेश के संयोजक परम सम्माननीय गुरुदेव तिरु. दिलीप सैयाम जी के मार्गदर्शन में प्रदेश स्तरीय भव्य कार्यक्रम का समापन हुआ। वंही कार्यक्रम दौरान संस्कृति को बचाने सांस्कृतिक आयोजनों का समावेश का झलक नर्तक दलों का मनमोहक रहा। वहीं मंचीय उद्बोधन में विभिन्न सामाजिक विचारकों द्वारा अपने-अपने विचार रखे गए विचारों की कड़ी में जनपद पंचायत नारायणगंज उपाध्यक्ष इंजीनियर भूपेंद्र वरकडे जी द्वारा कहा गया कि सामाजिक संस्कृति रीति नीतियों को संजोए रखने का यह पहल समिति का सराहनीय प्रयास है। वही गोंडवाना गुरुदेव महाकाल दुर्गे भगत जगत जी के महान पहल से राष्ट्रीय स्तर में सामाजिक लोगों को गुरु के रूप में मार्ग प्रशस्त करने संस्कृति को सहेजने का महान कार्य किया गया है जो की वंदनीय है।गोंडवाना साम्राज्य का ह्रदय गढ़ा मंडला के विकास खण्ड नारायणगंज अंतर्गत ग्राम पंचायत सिवनी माल नर्मदा तट के तीर बसा यह गांव दोनों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ प्राकृतिक सौंदर्य का छटा बिखरेता हुआ अपने अनोखे सौंदर्य के लिए हमेशा सराहा जाता है। जहां गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति मध्य प्रदेश के तत्वाधान में प्रदेश स्तरीय भोजली महोत्सव का आयोजन किया गया जहां पर लगभग 8 जिलों से भोजली माताएं भोजली लेकर पहुंची स्थानीय समिति के जिला सचिव तिरू.झुन्नी सैयाम द्वारा पर्व की विशेषताओं के बारे में बताया गया की 551 भोजली इस महोत्सव में शामिल हुए। सावन पूर्णिमा के 7 दिन पूर्व अपने घरों में सात प्रकार की बीजों का उपयोग कर भोजली बोया जाता है 7 दिन सेवा करने के पश्चात पूर्णिमा के दिन भोजली महोत्सव का आयोजन होता है। जहां पर सब अपने-अपने भोजली लेकर पहुंचते हैं। भोजलि पूजन पश्चात इन्हें मां नर्मदा तट पर सरवर स्नान कराया गया। पश्चात सभी माताएं अपने अपने भोजली अपने घर लेकर जाते हैं। गोंडी धर्म संस्कृति रीति नीति को जीवित रखने का निरंतर पहल करने वाले गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति मध्य प्रदेश के संयोजक परम सम्माननीय गुरुदेव तिरु. दिलीप सैयाम जी के मार्गदर्शन में प्रदेश स्तरीय भव्य कार्यक्रम का समापन हुआ। वंही कार्यक्रम दौरान संस्कृति को बचाने सांस्कृतिक आयोजनों का समावेश का झलक नर्तक दलों का मनमोहक रहा। वहीं मंचीय उद्बोधन में विभिन्न सामाजिक विचारकों द्वारा अपने-अपने विचार रखे गए विचारों की कड़ी में जनपद पंचायत नारायणगंज उपाध्यक्ष इंजीनियर भूपेंद्र वरकडे जी द्वारा कहा गया कि सामाजिक संस्कृति रीति नीतियों को संजोए रखने का यह पहल समिति का सराहनीय प्रयास है। वही गोंडवाना गुरुदेव महाकाल दुर्गे भगत जगत जी के महान पहल से राष्ट्रीय स्तर में सामाजिक लोगों को गुरु के रूप में मार्ग प्रशस्त करने संस्कृति को सहेजने का महान कार्य वन्दनीय है।
गुरु के सानिध्य में व्यक्ति सीखता है जो जिज्ञासा व लगन से सीखता है वह अपने जीवन पथ पर आगे बढ़ता है।अपनी पुरखा संस्कृति और पुरखा व्यवस्था को जानें मानें पहचानें आज दुनिया में पहचान की लड़ाई चल रही अपने वजूद को कायम, जिंदा और स्थापित करने की लड़ाई जारी है, हम बदलेंगे हमारी आने वाली पीढ़ी बदलेगी, हमारी सोच बदलेंगी सामाजिक बदलाव नजर आएगा जिस पर हमारी भावी पीढ़ी चलेगी।।
हम अपनी महान गोंडियन संस्कृति (जो विश्व संस्कृति की जननी है) और पुरखा व्यवस्था के वाहक बनें हमारे पुरखा पूर्वजों ने अपनी शहादत अपनी आने वाली पीढ़ी के गौरव और वजूद को जिंदा रखने के लिए दिया मतलब हमारे लिए दिया.. हमें भी अपनी भावी पीढ़ी को देने के लिए विचार करना चाहिए...
गोंड़ी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति समाज में ऐसी व्यवस्था का निर्माण किया है जहाँ हमें डरा न सके हमारे स्वाभिमान को कोई डिगा न सके।गुरुदादा का संदेश अपनी पहचान अपने धर्म भाषा संस्कृति पुरखा शक्ति और समाज के पीछे बनाओ किसी व्यक्ति के पीछे नहीं, व्यक्ति के पीछे की पहचान आपको चापलूसी स्वार्थ सिखाएगा समाज के पीछे पहचान स्वाभिमान सम्मान स्वावलंबन का निर्माण करेगा।
कार्यक्रम दौरान उपस्थित रहे- तिरु. दिलीप सैयाम जी गुरुदेव प्रदेश संयोजक गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति, इंजीनियर भूपेंद्र वरकडे उपाध्यक्ष जनपद पंचायत नारायणगंज जिला संयोजक, झुन्नी सैयाम जिला सचिव, आर सी गज्जाम, संजय मरकाम, भागवत तुमराची, धीरा मरावी, कलीराम मर्रापा, धन्नी परस्ते, सेमू सिंह मरकाम, रतन वरकडे, सेवाराम पन्द्रों, सर्जन वरकडे, दुर्गेश उइके, काशीराम वरकडे, पहल मरावी, मनोज कुड़ापे, इंद्र सिंह उद्दे, करमसेन धुर्वे, सुरेश मरकाम, झामू मरकाम, रहमत पन्द्राम, जयपाल परस्ते, लम्मू मरकाम, अनूप धुर्वे, सहित समिति के कार्यकर्ता पदाधिकारी सामाजिक जन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
संवाददाता बेनी लाल सिंगरौरे


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