आषाढ़ मास की आखिरी एकादशी कब है? जानें, तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण का समय - revanchal times new

revanchal times new

निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

Breaking

रेवांचल टाइम्स अखबार पाठकों से अनुरोध करता है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें.. ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें... साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए.. प्रकाशन हेतु ख़बरें, विज्ञप्ति मोबाइल- 9406771592 पर व्हाट्सएप्प करें

 आवश्कता है  आवश्कता है ....

रेवांचल टाईम्स समाचार पत्र एव वेव पोर्टल में मध्यप्रदेश के सभी संभाग, जिला, तहसील, विकास खंडों, में संवाददाताओं की एंव विज्ञापनों व खबरों से सबंधित व्यक्ति संपर्क करें इन नम्बरों में 👉 9406771592/ 9425117297/ 8770297430/9165745947

Wednesday, July 14, 2021

आषाढ़ मास की आखिरी एकादशी कब है? जानें, तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण का समय



Devshayani Ekadashi 2021: आषाढ़ मास की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी तिथि 19 जुलाई 2021 से आरंभ हो रही है. इस एकादशी की तिथि को देवशयनी एकादशी कहा जाता है.

Devshayani Ekadashi 2021 Date: देवशयनी एकादशी को हिंदू धर्म में विशेष माना गया है. इस दिन चातुर्मास का आरंभ होता है. भगवान विष्णु इस तिथि से चार मास के लिए योग निद्रा में लीन में हो जाते हैं. इसीलिए आषाढ़ मास की इस तिथि को देवशयनी एकादशी कहा जाता है. इस दिन व्रत रखने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती है.


पंचांग के अनुसार 19 जुलाइ्र 2021, सोमवार से आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि आरंभ हो रही है. लेकिन एकादशी का व्रत 20 जुलाई 2021, मंगलवार को रखा जाएगा और देवशयनी एकादशी व्रत का पारण यानि समापन 21 जुलाई 2021, बुधवार के दिन द्वादशी की तिथि में किया जाएगा.


देवशयनी एकादशी व्रत का महत्व (Devshayani Ekadashi 2021 Mahatva)
एकादशी व्रत के महामात्य का वर्णन महाभारत की कथाओं में मिलता है. मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर और अर्जुन को इस व्रत के बारे में विस्तार से बताया था. धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर ही एकादशी व्रत को विधिवत धारण और पारण किया था. जिसके फलस्वरूप मोक्ष की प्राप्ति हुई थी. एकादशी का व्रत सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना गया है. इस व्रत को विधि पूर्वक पूर्ण करने से जीवन में सुख समृद्धि और शांति आती है. इसके साथ ही हर प्रकार की परेशनी दूर होती है. इस एकादशी को इन नामों से भी जानते हैं-

No comments:

Post a Comment