दुष्काल में भी जनगणना जरूरी है, होना चाहिए... - revanchal times new

revanchal times new

निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

Breaking

रेवांचल टाइम्स अखबार पाठकों से अनुरोध करता है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें.. ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें... साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए.. प्रकाशन हेतु ख़बरें, विज्ञप्ति मोबाइल- 9406771592 पर व्हाट्सएप्प करें

 आवश्कता है  आवश्कता है ....

रेवांचल टाईम्स समाचार पत्र एव वेव पोर्टल में मध्यप्रदेश के सभी संभाग, जिला, तहसील, विकास खंडों, में संवाददाताओं की एंव विज्ञापनों व खबरों से सबंधित व्यक्ति संपर्क करें इन नम्बरों में 👉 9406771592/ 9425117297/ 8770297430/9165745947

Saturday, June 5, 2021

दुष्काल में भी जनगणना जरूरी है, होना चाहिए...

 दुष्काल में भी जनगणना जरूरी है, होना चाहिए...




रेवांचल टाईम्स डेस्क :- एक बहस चल पड़ी है की कोरोना दुष्काल में या उसके बाद जनगणना हो और कब हो? दरअसल,जनगणना में संबंधित इलाके, राज्य अथवा देश के कुछ लोगों से जानकारियां इकट्ठा करके यह आकलन किया जाता है, और आबादी के इस छोटे या सैंपल डाटा को दिखाने के लिए जिस बड़े आंकड़े को आधार बनाया जाता है, वह क्या है ? १९ वीं सदी के मध्य तक ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत पर करीब-करीब पूरा कब्जा कर लिया था। १८५८ में, ब्रिटिश संसद में भारत सरकार अधिनियम, १८५८ पारित किया गया, जिसके तहत भारतीय उपनिवेश का नियंत्रण कंपनी से लेकर ब्रिटिश राजशाही को सौंप दिया गया। मगर शासन स्थापित करने के लिए ब्रिटिश सरकार को लोगों और उनकी रिहाइश को लेकर विस्तृत और विश्वसनीय डाटा की जरूरत थी। आखिरकार, वह कैसे तय कर सकती थी कि उनकी महारानी ने भारत परअपना प्रभुत्व कायम रखने के लिए जो अमानवीय टैक्स लगाया है, वह देश के हर निवासी से वसूला जाए?




औपनिवेशिक सत्ता १८०१ से ही इसे अपने यहां कर रही थी। इस कवायद को ‘सेन्सस’, यानी जनगणना कहा गया, जो लैटिन शब्द ‘सेंसेर’ से निकला है। रजिस्ट्रार जनरल ऐंड सेन्सस कमिश्नर के कार्यालय बनाए गए और १८८१ में भारत में पहली बार जनगणना हुई। बेशक जनगणना का मूल उद्देश्य जबरन वसूली की मंशा को पूरा करना था, लेकिन इसका लाभ कई विभागों को मिला। शिक्षा विभाग ने प्राथमिक शिक्षा की अपनी योजना बनाने में इसका इस्तेमाल किया। लोक-निर्माण विभाग ने इसका उपयोग सड़क नेटवर्क की योजना बनाने में किया। बिजली संयंत्र स्थापित करने और ग्रिड तक लाइन लगाने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया। और, रेलवे ने पटरियां बिछाने की योजना बनाने में इसका उपयोग किया। जनगणना के आंकड़ों ने जैसे ही बुनियादी ढांचे को प्रभावित किया, लोगों की बडे़ पैमाने पर आवाजाही बढ़ गई। अब फिर रोजगार की समस्या आई है जनगणना इस समस्या के निदान का रास्ता खोजेगी |

औपनिवेशिक राज की कई परंपराएं १९४७ के बाद भी कायम रहीं। जनगणना भी उनमें से एक है। अमूमन पांच या दस साल पर होने वाली जनगणना को राष्ट्रीय संसाधनों के इस्तेमाल के लिए अनिवार्य माना जाता है। अमेरिका दशक के अंत में जनगणना करता है, जो २०२० में कोविड-१९ के बावजूद पूरा किया गया, तो चीन ने भी पिछले साल अपनी दशकीय जनगणना पूरी की है। भारत में पिछली बार २०१० में गिनती शुरू हुई थी, जो २०११ में पूरी हुई। अपने यहां इसका बुनियाद परिवार सर्वे है। मगर यह सर्वे पिछले साल जैसे मृतप्राय: रहा। अब २०२१ के मध्य में आ चुके हैं, लेकिन जनगणना का अब तक कोई संकेत नहीं मिल रहा है। सवाल है, २०२१ की जनगणना की परवाह आखिर हमें क्यों नहीं करनी चाहिए? पहली वजह, अब हम यह जानते हैं कि सरकार ने कोविड-१९ वैक्सीन का जितना ऑर्डर दिया, वह आबादी के घनत्व को ध्यान में रखकर नहीं दिया जा सका था। जनगणना से न सिर्फ हमें यह पता होता है कि देश में कितने लोग रहते हैं, बल्कि उनकी उम्र, लिंग, मूल निवास, परिवार और शिक्षा का स्तर भी हम जान लेते हैं। वर्ष २०११ की जनगणना में ऐसे सभी विवरण मौजूद हैं, जनगणना होने पर २०२१ में भी ये हमारे पास होते।




कई राज्यों में जनसंख्या प्रबंधन की हालत खस्ता है |संसद में कुछ राज्यों की नुमाइंदगी काफी बढ़ जाएगी। दक्षिण व पश्चिम भारत को नुकसान होगा। जाहिर है, परिसीमन के लिए भी हमें जनगणना के तमाम पहलुओं पर गौर करना होगा। संघ और राज्यों के बीच कर राजस्व के बंटवारे की वित्त आयोग निगरानी करता है। वस्तु एवं सेवा कर, यानी जीएसटी इस वितरण को और विवादास्पद बना देता है। राजस्व के निर्धारण में भी जनसंख्या अहम भूमिका निभाती है।इन दिनों , देश में सांप्रदायिक राजनीति जारी है। कई नेता यह आरोप लगाते हैं कि बहुसंख्यक आबादी घट रही है और अल्पसंख्यकों की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। जमीनी हकीकत जानने के लिए जनगणना एक अखिल भारतीय प्रक्रिया है।

                     

               राकेश दुबे


No comments:

Post a Comment