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Wednesday, June 9, 2021

खरीफ पूर्व तैयारी शुरू करने सलाह



मण्डला 9 जून 2021

उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास से प्राप्त जानकारी के अनुसार बारिश और आगामी मानसून के आगमन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए किसान खरीफ के पूर्व तैयारी कर लें। इस साल समय पर मानसून आने की संभावना है। अतः सभी किसान खरीफ से संबंधित अपनी तैयारियों में अवश्य ध्यान दें जैसे- खेत की गहरी जुताई - उत्पादन में स्थिरता की दृष्टि से दो-तीन वर्ष में गहरी जुताई करना लाभप्रद होता है। अतः जिन किसानों ने खेत की गहरी जुताई नहीं की हो तो अवश्य कर लें। उसके बाद बक्खर/कल्टीवेटर एवं पाटा चलाकर खेत तैयार कर लें।

उन्होंने कहा कि खेत में अंतिम बखरनी से पूर्व अनुशंसित गोबर खाद 10 टन प्रति हेक्ट. या मुर्गी खाद 2.5 टन प्रति हेक्ट. की दर से डाल कर खेत में फैला लें। अच्छे उत्पादन के लिए खेत के अनुसार फसल का चुनाव करें। खेत की ऊंची, नीची और मध्यम स्थिति के अनुसार और उस क्षेत्र में लगने वाले कीट/व्याधियों को ध्यान में रखते हुए उन्नत एवं प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें। ऊंची जमीन के लिए कम दिन में तैयार होने वाली किस्में, नीचे वाली जमीन के लिए लंबी अवधि वाली और मध्यम जमीन हेतु मध्यम अवधि के किस्मों का चयन करें। सहकारी समितियों एवं बाजार में आधार, प्रमाणित, हायब्रिड एवं उन्नत बीज उपलब्ध हैं। बीज की गुणवत्ता एक प्रमुख बिन्दु है अतः उन्नत बीज लाइसेंसधारी विक्रेता से ही क्रय करें और साथ में पक्का बिल अवश्य लें। यदि स्वयं के पास का बीज उपयोग करते हैं, तो अंकुरण परीक्षण करलें और कम से कम 75 से 80 प्रतिशत अकुंरण क्षमता वाले बीज का प्रयोग करें। बीजों को 17 प्रतिशत नमक के घोल स उपचारित करने पर कमजोर और रोगजनित बीज तैरने लगते है जिन्हें अलग कर डूबे हुये बीजों का बोनी के लिये उपयोग किया जाना चाहिये। यदि विगत वर्ष हायब्रिड बीज का उपयोग किया गया हो तो इस वर्ष उसके बीज का उपयोग न करें। नए बीज का क्रय कर उपयोग किया जाए।

उन्नत किस्मों का उपयोग

धान - जल्दी पकने वाली प्रजातियां - दन्तेश्वरी, जे.आर. -206, जे.आर.-81, सहभागी, एम.टी.यू. 1010; मध्यम अवधि वाली प्रजातियां - क्रांति, महामाया, आई.आर.-64, आई.आर.-35, पूसा बासमति-1, पूसा सुगंधा-5; देर से पकने वाली प्रजातियां - एम.टी.यू. 1001, स्वर्णा।

अरहर - राजीवलोचन, आई.सी.पी.एल.-87, आशा, टी.जे.टी.-501 और राजेश्वरी। बचाव के उपाय की तर्ज पर अगर हमें फसलों को रोगों से बचाना है तो बीज को उपचारित करके काम लेना चाहिए। बीजोपचार सबसे पहले बीज को फफूंदनाशी फिर कीटनाशी और सबसे बाद में कल्चर से उपचारित करना चाहिए। इस हेतु जैविक फफूंदनाशक ट्रायकोडरमा विरडी 5 ग्राम प्रति किलो बीज अथवा थायरम $ कार्बाेक्सीन 3 ग्राम प्रति किलो बीज या थायरम $ कार्बेन्डाजिम 3 ग्राम प्रति किलो बीज के मान से उपचारित करें। विगत वर्ष धान में फॉल्स स्मट का प्रकोप अत्याधिक देखा गया था, अतः ट्राइकोडर्मा या अन्य फफूंदनाशक से बीज उपचार करने की सलाह दी जाती हैं। भूमि उपचार करने से भूमि जनित रोगो और कीटों की समस्या से छुटकारा मिल सकता है। ट्राइकोडर्मा 2.5 किलो प्रति हेक्टर को 50 किलो गोबर खाद या वर्मीकम्पोस्ट में मिलाकर मिट्टी में मिलाने की सलाह दी जाती है। धान में छिटकवां विधि से बुआई न करने की सलाह दी जाती हैं। कतार बोनी, रोपा और श्री विधि से धान की रोपाई करने से अधिक उत्पादन प्राप्त होता हैं। खरीफ सीजन हेतु उर्वरक एवं बीज आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के यहां भण्डारित है। किसान भाइयों से आग्रह है कि पूर्व में ही रकबे के अनुसार उर्वरक का अग्रिम भण्डारण कर ले ताकि बाद में यूरिया या अन्य उर्वरक की कमी का सामना न करना पडे़। यूरिया और डी.ए.पी. के अलावा अन्य विकल्प जैसे एन.पी.के. ओर एस.एस.पी. भी उपलब्ध है जिनका उपयोग करने की सलाह दी जाती है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड में पाये गये तत्वों की कमी या अधिकता के अनुसार अनुशंसित मात्रा में ही उर्वरक का उपयोग करें। बागवानी की खेती के लिए भी तैयारी कर लें। रोपण के लिए अंकुरित पौधों के लिए बारिश पूर्व गड्डे तैयार कर लें। रोपाई के दौरान गड्ढों को भरने हेतु गोबर खाद और उर्वरक की व्यवस्था सुनिश्चित कर लें। बारिश पूर्व जानवरों का टीकाकरण अवश्य करवा लें। टीकाकरण कराने से बीमारियों से जानवर प्रभावित नहीं होता है।

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