जिले में धान के फसल के साथ साथ दलहन एवं तिलहन का रकबा प्रतिवर्ष बढ़ने लगा है। यहां के किसान दलहन,तिलहन की खेती पर ध्यान देने लगे हैं। इसके कारण धान के साथ-साथ खरीफ के मौसम में लगने वाले अरहर, उड़द जैसी दलहन फसलों की व्यापक पैमाने पर किसान खेती करने लगे हैं। पर इस साल विदा होती बरसात से फसलों के प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है। इन दिनों होने वाली बारिश एवं आसमान में छाए बादल दलहन फसलों के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। तैयार दलहन की फसलों पर कीट प्रकोप की आशंका बढ़ गई है। जिले के अधिकांश स्थानों पर लगी उड़द की फसल पक चुकी है। वहीं कई जगहों पर अभी खेतों में लगी उड़द की फसल पकने की कगार पर है। इससे किसान चिंता में पड़ गए हैं,। वही निवास से महज 10 किलोमीटर दूर ग्राम बारमदाना निवासी तारेन्द्र शुक्ला जिन्होंने ने आपने खेत मे उडद व मुम लगाई है। बारिश थमने के बाद उनसे मूंग व उडद की फसल को हुई बारिश से होने वाले नुकसान व फायदे के बारे पूंछा गया। उन्होंने जानकरी देते हुये बताया की। अभी फसल उडद व मुम दोनों ही फसल पकने की कगार मे वही इस तरीके की हल्की फ़सल से ज्यादा नुकसान तो नहीं है लेकिन अगर यह बारिश लगातर होती रही तो फ़सल पूर्ण रूप से नस्ट हो जाएगी। व फसल मे कीड़े भी लग सकते है।
रेवांचल टाइम्स निवास से देवेन्द्र चौधरी की रिपोर्ट

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