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Tuesday, May 25, 2021

चंद्र ग्रहण 26 मई 2021, दिन बुधवार चंद्र ग्रहण का दोष नही होने से सूतक हमारे यहां नहीं होगा

 चंद्र ग्रहण 26 मई 2021, दिन बुधवार चंद्र ग्रहण का दोष नही होने से सूतक हमारे यहां नहीं होगा




रेवांचल टाइम्स  - साल का पहला चंद्र ग्रहण 26 मई को लगने जा रहा है। संपूर्ण भारत में यह ग्रहण नहीं दिखाई देगा। 26 मई को वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि है, जिसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है। ग्रहण का वैज्ञानिक महत्व होने के साथ ही धार्मिक और ज्योतिष महत्व भी होता है ज्योतिष गणनाओं के अनुसार इस बार पड़ने वाले चंद्र ग्रहण का सबसे अधिक प्रभाव वृश्चिक राशि पर पड़ने जा रहा है। 26 मई को लगने वाला चंद्र ग्रहण वृश्चिक राशि और अनुराधा नक्षत्र में लगने जा रहा है। चंद्र ग्रहण के दौरान वृश्चिक राशि और अनुराधा नक्षत्र के लोगों को इस दिन विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। 


भारत में उपछाया चंद्र ग्रहण


यह भारत में उपछाया की तरह दिखाई देगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार उपछाया चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल मान्य नहीं होता है।  साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 19 नवंबर, 2021 को लगेगा।


26 मई को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत के पूर्वी राज्यों अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, पश्चिम बंगाल, नागालैंड, पूर्वी उड़ीसा, मणिपुर, त्रिपुरा, असम और मेघालय में देखा जाएगा।


इन देशों में दिखेगा चंद्र ग्रहण

जापान, बांग्लादेश, सिंगापुर, बर्मा, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस, उत्तरी एवं दक्षिणी अमेरिका, प्रशांत और हिंद महासागर।


चंद्र ग्रहण का मानव जीवन पर प्रभाव


जब राहु या केतू की युति चंद्र के साथ हो जाती है, तो चंद्र ग्रहण दोष हो जाता है। खगोलशास्त्र के वैज्ञानिक आधार पर जब सूर्य ,पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में होते हैं तो चंद्रग्रहण लगता है। दूसरे शब्‍दों में, चंद्र के साथ राहु और केतू का नकारात्‍मक गठन, चंद्र ग्रहण दोष कहलाता है। ग्रहण दोष का प्रभाव, विभिन्‍न राशियों पर विभिन्‍न प्रकार से पड़ता है जिसके लिए जन्‍मकुंडली, ग्रहों की स्थिति भी मायने रखती है.


चंद्र ग्रहण दोष के विभिन्‍न कारण

चंद्र ग्रहण दोष के कई कारण होते हैं और हर व्‍यक्ति के जीवन पर उसका प्रभाव भी अलग तरीके से पड़ता है। चंद्र ग्रहण दोष का सबसे अधिक प्रभाव, उत्‍तरा भादपत्र नक्षत्र में पड़ता है। जो जातक, मीन राशि का होता है और उसकी कुंडली में चंद्र की युति राहु या केतू के साथ स्थित हो जाएं, ग्रहण दोष के कारण स्‍वत: बन जाते हैं। ऐसे व्‍यक्तियों पर इसके प्रभाव अधिक गंभीर होते हैं. चंद्र ग्रहण दोष के अन्‍य कारण –राहु, राशि के किसी भी हिस्‍से में चंद्र के साथ पाया जाता है- जबकि केतू समान राशि में चंद्र के साथ पाया जाता है, राहु, चंद्र महादशा के दौरान ग्रहण लगाते हैं


चंद्र ग्रहण दोष के दुष्परिणाम

व्‍यक्ति दिक्कत में रहता है, दूसरों पर दोष लगाता रहता है, उसके मां के सुख में भारी कमी आ जाती है। उसमें सम्‍मान में कमी अाती है। हर प्रकार से उस व्‍यक्ति पर भारी समस्‍याएं आ जाती है जिनके पीछे सिर्फ वही दोषी होता है। साथ ही स्‍वास्‍थ्‍य सम्‍बंधी दिक्‍कतें भी आती हैं। सूर्य और चंद्र में से सूर्य के कारण दोष व्यक्तिगत सफलता, शोहरत नाम ,समग्र विकास में पड़ाव परिणाम प्राप्त करने में बाधाओं का सामना। एक औरत बार-बार गर्भपात, बच्चे और दोषपूर्ण पुत्रयोग की अवधारणा में समस्या की तरह बच्चे से संबंधित समस्या का सामना करना पड़ता। स्वास्थ्य समस्याओं को भी सूर्य दोष के कारण प्रमुख हैं। चंद्र दोष अपने स्वयं के बुरे प्रभावों के रूप में यह व्यक्ति अनावश्यक तनाव देता है.


दोष के लक्षण

अविश्वास, भावनात्मक अपरिपक्वता, लापरवाही, याददाश्त में कमी, असंवेदनशीलता अस्वास्थ्य छाती, फेफड़े, सांस लेने और मानसिक अवसाद से संबंधित समस्याऐं उत्पन्न होती हैं। आत्म विनाशकारी प्रकृति भी हो जाता है व्यक्ति के मन में आत्महत्या करने की इक्षा जागृत होती है।यदि आप हमेशा कश्मकश में रहते हैं, इधर-उधर की सोचते रहते हैं, निर्णय लेने में कमजोर हैं, भावुक एवं संवेदनशील हैं, अन्तर्मुखी हैं, शेखी बघारने वाले व्यक्ति हैं, नींद पूरी नही आती है, सीधे आप सो नहीं सकते हैं अर्थात हमेशा करवट बदलकर सोएंगे अथवा उल्टे सोते हैं, भयभीत रहते हैं तो निश्चित रुप से आपकी कुंडती में चन्द्रमा कमजोर होगा | समय पर इस कमजोर चंद्रमा अर्थात प्रतिकूल प्रभाव को कम करने का उपाय करना चाहिए अन्यथा जीवन भर आप आत्म विश्वास की कमी से ग्रस्त रहेंगे.


जिन व्यक्तियों का चन्द्रमा क्षीण होकर अष्टम भाव में और चतुर्थ तथा चंद्र पर राहु का प्रभाव हो, अन्य शुभ प्रभाव न हो तो वे मिरगी रोग का शिकार होते हैं. जिन लोगों का चन्द्रमा छठे आठवें,बारहवें आदि भावों में राहु से दृष्ट हो, वैसे पाप दृष्ट हो तो उनको रक्त चाप आदि होता है.


चंद्र दोष निवारण के  तरीके

चंद्र दोष के उपाय जो शास्त्रों में उल्लेखित हैं उनमें सोमवार का व्रत करना, माता की सेवा करना, शिव की आराधना करना, मोती धारण करना, दो मोती या दो चांदी का टुकड़ा लेकर एक टुकड़ा पानी में बहा देना तथा दूसरे को अपने पास रखना है.


सोमवार को सफेद वास्तु जैसे दही, चीनी, चावल, सफेद वस्त्र, 1 जोड़ा जनेऊ, दक्षिणा के साथ दान करना और ॐ सोम सोमाय नमः का १०८ बार नित्य जाप करना श्रेयस्कर होता है.


जाप मंत्र

ऊँ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:


चंद्र नमस्कार के लिए मंत्र

दधि शंख तुषारामं क्षीरोदार्णव सम्भवम्. नमामि शशिनं भक्तया शम्भोर्मकुट भूषणम्..


शिव का महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्ष्रिय मामृतात्.


“मृत संजीवनी मंत्र “ 

— “ऊँ हौं जूं स: ऊँ भूर्भुव: स्व: ऊँ ˜त्र्यंबकंयजामहे ऊँ तत्सर्वितुर्वरेण्यं ऊँ सुगन्धिंपुष्टिवर्धनम ऊँ भर्गोदेवस्य धीमहि ऊँ उर्वारूकमिव बंधनान ऊँ धियो योन: प्रचोदयात ऊँ मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ऊँ स्व: ऊँ भुव: ऊँ भू: ऊँ स: ऊँ जूं ऊँ हौं ऊँ”


यह मंत्र दैत्य गुरु शुक्राचार्य द्वारा दधीचि ऋषि को प्रदान किया गया था. चन्द्र दोष निवारण के लिये शिवरात्रि पर रुद्राभिषेक करवाएं. 


यदि आपके आसपास कोई शिव मंदिर हो तो वहां जाकर विशेष पूजा -अर्चना करनी चाहिए. उस रात्रि को संभव हो तो शिव मंदिर में जाकर जागरण करें.


पं राम गोपाल शाश्त्री नीलू महाराज

वरदान आश्रम अंजनिया

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