रेवांचल टाईम्स :- आज देश में झोला बड़ा नाम कमा चुका है।क्यूँ नहीं, आखिर आदिम युग से झोला + झोली ही तो थे जिसको कंधे में टांग बड़े बड़े महापुरुषो ने पुरे संसार को नाप लिया और इस झोले से ही मानव को ऐसे ऐसे मन्त्र और जड़ी दिये की मनुष्य धन्य हुये बिन न रहा, पर न झोला का आकार बढ़ा न उसकी थोंद ही निकली, क्योंकि इस थैले में परोपकार के गुण भरे थे, मानव जाति के समुचित बिकार/ रोग के निदान की बूटी हुआ करती थी।
पर आज उस थैले का नाम बदनाम कर दिया गया
अब देखो न_ देश के मुखिया भी उस थैले की उपयोगिता समझते हैं, जब उन्होंने कहा कि ``में ठहरा फ़कीर मेरा क्या झोला उठाया चल दिया?
फिर तो झोला बड़ा चमक गया वो भी बड़े बड़े नेताओं की जुबान से आये दिन निकलकर कई घंटे अपने नाम की महत्ता पर देश का समय बर्वाद करवाता है? फिर तुर्रा ये की में ऐसा वैसा झोला थोड़ी न हूँ, में तो प्रधानमंत्री के मुँह से निकला हुआ झोले की महत्ता वाला झोला हूँ ।
_कहते हैं धूल के ढेर का भी समय बदलता है। सो भला हो इस सरकार का जिसने देश के मेडिकल सिस्टम को और अनुपातिक स्टाफ की कभी चिंता ही नहीं की, और कोरोना आ धमका जिसने झोले की भी अहमियत बता दी, मानों इसको जिसने भी टाँग लिया समझो एम बी बी एस हो गया?
अब जिले के चहेते मंत्री जी अगर आपके स्वास्थ का ख्याल रखते हुये अनुपातिक दरार को भरने झोलाछाप डॉक्टरो की सिफारिश कर ही दी तो इसमे बेजा बात क्या हुई?
आखिर उन्होंने ये तर्क भी तो दिया है_कि सभी झोलाधारी डॉ बुरे नहीं हैं अच्छे भी हैं?
हाँ ये अलग बात है कि विधायक जी पूँछ रहे हैं कि झोलाधारी + झोलाछाप डॉ को कैसे स्पष्ट करेंगे की किसका झोला डिग्री झोल वाला है, या किसका झोला होम्योपैथिक डिग्री धरकर ऐलोपैथिक इलाज ही नहीं केंसर जैसी गंभीर बीमारी का भी इलाज धड़ल्ले से गांव गांव कर रहे हैं।
अच्छा होगा अगर सांसद + मंत्री जी अपनी सरकार से ही इन= बी एच एम सी और अन्य ऐसी ही अमान्य डिग्री धारी डॉक्टरो की सिफारिस कर दें ।
और पुरे जिले ही क्या पुरे प्रदेश के ऐसे झोलाछाप डॉ की गिनती करवाकर उनका भाग्य ही नहीं आम जनता का भी भाग्य चमका दें जो बीमार होने पर महज एक गोली के अभाव में बेमौत मारे जाते हैं।
जनता को इंतज़ार है तो बस उन डॉक्टरो का जो गाँव में जाकर इलाज कर सके । आपके प्रयास और आदेश के बाद ....

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