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नदियों पर इंसान का जीवन निर्भर और नदियों का अस्तित्व खतरे में...



रेवांचल टाईम्स :- जल ही जीवन का आधार है, इसलिए किसी भी देश में बहने वाली नदियों को वहां की जीवनरेखा कहा जाता है। नदियां न केवल करोड़ों लोगों की प्यास बुझाती हैं, बल्कि आजीविका का माध्यम भी हैं। पारिस्थितिकी तंत्र और भूजल स्तर को बनाए रखने में भी नदियां अहम योगदान देती हैं। एक तरह से जल या नदियां धरती पर ‘जीवन’ को ढोती हैं, जिस कारण इन्हीं नदियों पर इंसान का जीवन निर्भर है। मरणोपरांत इंसान के अवशेष भी नदियों में ही बहाए जाते हैं, जो अनंतकाल के लिए नदी की गोद में विलीन हो जाते हैं, लेकिन आज देश की नदियां इंसान का मैल और गंदगी ढो रही हैं। इसने नदियों के ही अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है। ऐसे में नदियों में लगातार बढ़ते प्रदूषण के आईन में हर कदम पर महामारी ही नजर आती है, जो भविष्य की चमक को धूमिल करती है। यही हाल चौरई की पेंच नदी में देखा जा सकता है नदी में बहा देना लोगों के द्वारा विसर्जन चाहे वह किसी भी प्रकार का हो मूर्ति विसर्जन हो पूजन सामग्री विसर्जन हो या खारी विसर्जन हो इन सारी चीजों का विसर्जन किस नदी में किया जा रहा है चोरी नगर में अस्थि विसर्जन की चर्चा को लेकर विषय बना हुआ है कि जहां से नगर चौरई के लिए पेयजल व्यवस्था की गई है वहीं पर लोगों के द्वारा अस्थि विसर्जन का कार्यक्रम किया जा रहा है किससे पानी की शुद्धता खत्म होती है नगर वासियों का क्या कहना है कि भले ही नगर पालिका के द्वारा पानी को फिल्टर करा कर दिया जा रहा है परंतु फिर भी हम वहां पानी नहीं पिएंगे जिस स्थान पर अस्थि विसर्जन का कार्यक्रम किया जा रहा है जबकि सभी को पता है की यह नदी के तट पर नगर की पेयजल व्यवस्था के लिए पाइपलाइन लगाई गई है जिसका का जल चौरई नगर की जनता के पीने की उपयोग में लिया जाता है जनता का कहना है कि हमें संस्कार कार्यक्रमों से कोई आपत्ति नहीं संस्कार कार्यक्रम अपनी जगह यथावत है और रहेंगे परंतु जिस स्थान पर चौरई नगर पालिका के द्वारा जल सप्लाई किया जाता है वही पर अस्थि विसर्जन का कार्यक्रम भी किया जाता है इसको लेकर चौरई की आम जनता को स्वीकार नहीं है जहां लोगों के पीने योग्य पानी की व्यवस्था की गई है उसी स्थान से अन्यत्र किसी स्थान पर अस्थि विसर्जन की व्यवस्था प्रशासन करें ताकि चोराई नगर में आने वाले जल में शुद्धता बनी रहे


 इनका कहना है कि नगर में आने वाले शुद्ध जल के स्थान से थोड़ी दूरी पर अस्थि का विसर्जन किया जाए जिससे नगर में आने वाले जल की शुद्धता बनी रहे 

 नोटरी व समाज सेवक प्रमोद तिवारी चौरई 


इनका कहना है कि  नगर चोरई में इस बात को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है इस बात की जानकारी मुझे भी है अतः प्रशासन से यह निवेदन है कि वहां तत्काल प्रशासनिक कर्मचारी को ड्यूटी लगा कर अस्ति विसर्जन आने वाले व्यक्तियों को उस स्थान से थोड़ी दूरी पर विसर्जन करने के लिए प्रेरित करें 

 पूर्व पार्षद सुरेंद्र सोनी नगर पालिका चौरई 


          इनका कहना है कि

 नदियों में किसी भी प्रकार के विसर्जन के लिये  हाई कोर्ट के द्वारा प्रतिबंधित किया गया है फिर भी सामाजिक रीति रिवाज है उसको लेकर हम चाहे तो पेयजल की जहां व्यवस्था है उससे 100, 200 मीटर की दूरी पर  जन का कार्यक्रम किया जा सकता है जिससे पानी की शुद्धता बनी रहे 

 

पी एच ई (एस डी ओ) मनोज बघेल छिंदवाड़ा

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