दुनिया में कॉफी के दीवानों की कमी नहीं है. एक कप कॉफी के लिए लोग कई हजार रुपये तक खर्च करने को तैयार रहते हैं. दुनिया की सबसे महंगी कॉफी का नाम कोपीलुवाक (Kopi Luwak). अमेरिका में इसका एक कप लगभग 6 हजार रुपये का मिलता है. यह खास कॉफी कई एशियाई देशों समेत दक्षिण भारत (South India) में भी बनती है, लेकिन सबसे अजीब है इसे बनाए जाने की प्रक्रिया.
बिल्ली जैसे पशु के मल से बनती है कॉफी
इस कॉफी की सबसे खास बात है कि इसे इसे बिल्ली जैसे पशु की पॉटी (Civet Feces) या मल से तैयार किया जाता है. सिवेट बिल्ली के मल से तैयार होने वाली इस कॉफी को बिल्ली के नाम पर सिवेट कॉफी (Civet Coffee) भी कहते हैं. यह बिल्ली की प्रजाति है लेकिन कमाल की बात है कि इसकी पूंछ बंदर की तरह लंबी होती है.
सिवेट से बनता है इकोसिस्टम
आपको जानकर हैरानी होगी कि इकोसिस्टम बनाए रखने में सिवेट का काफी महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है. सिवेट बिल्ली कॉफी बीन्स खाने की शौकीन होती है. यह कॉफी की चेरी को अधकच्चा ही खा लेती है. ऐसे में चेरी का गूदा तो पच जाता है लेकिन बिल्लियां उसे पूरा का पूरा पचा नहीं पाती हैं क्योंकि इसके लिए उनकी आंतों में उस तरह के पाचक एंजाइम्स (Digestive Enzymes) नहीं होते हैं. ऐसे में बिल्ली के मल (Cat Feces) के साथ कॉफी का वह हिस्सा भी निकल जाता है, जिसे हजम नहीं किया जा सका था.
कैसे बनती है सिवेट कॉफी?
मल से बचे हुए हिस्से को शुद्ध किया जाता है. उसे सभी तरह के जर्म्स से फ्री (Germ Free) करने के बाद आगे की प्रक्रिया होती है. इस दौरान बीन्स को धोकर भूना जाता है और फिर कॉफी (Civet Coffee) तैयार की जाती है. अब आप सोच रहे होंगे कि बीन्स को बिल्ली के मल (Cat Feces Coffee) से ही लेने की क्या जरूरत है? दरअसल बिल्ली के शरीर में आंतों से गुजरने के बाद कई तरह के पाचक एंजाइम (Digestive Enzymes) मिलकर इसे बहुत बेहतर बना देते हैं. इसकी पौष्टिकता भी कई गुना बढ़ जाती है.
लोगों को बहुत पसंद है सिवेट कॉफी
नेशनल जिओग्रफिक की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि बिल्ली की आंतों से गुजरने के बाद इन बीन्स में पाए जाने वाले प्रोटीन की संरचना में बदलाव होता है. इससे कॉफी की एसिडिटी निकल जाती है और ज्यादा शानदार और स्मूद ड्रिंक तैयार होती है. सिवेट कॉफी को खाड़ी देशों, अमेरिका और यूरोप में काफी शौक से पिया जाता है. इसकी कीमत की वजह से इसे अमीरों की कॉफी कहा जाता है.

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