रेवांचल टाईम्स डेस्क :- देश अपनी रफ्तार से चल रहा है, सरकार अपनी रफ्तार से देश को वर्तमान दुष्काल से निजात दिलाने वाला वेक्सिनेशन उस रफ्तार से नहीं चल रहा है जिस रफ्तार से उसे चलना चाहिये था | वेक्सीन का निर्माण उपलब्धता और वितरण सब संकट में है | सारी व्यवस्था सरकार के हाथों में और खुद सरकार के मंत्री इस बारे में ठीक राय नहीं रखते है | जनता की राय मजबूरी में सरकार के साथ है, उसका पहला दुःख वेक्सीन के लिए आसानी से रजिस्ट्रेशन न होना है | दूसरा वेक्सीन के कम उत्पादन के कारण सुलभ न होना है | कई राज्यों से ये दोनों शिकायतें आना एक बात की पुष्टि करती है कि व्यवस्था में कहीं चूक है |
अनुमान पुख्ता हो गये है कि चीन के वुहान शहर से ही कोरोना सारी दुनिया में फैला है लेकिन चीन ने ही सबसे पहले कोरोना को काबू किया है। चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने तालाबंदी शुरु में ही लागू की और बड़ी सख्ती से लागू की। हमारे भारत की तरह वहां ढीला-ढाला इंतजाम नहीं था। चीनी नेताओं ने हमारे नेताओं की तरह भीड़भरी सभाओं में भाषणऔर जुमले नहीं उछाले और लोगों को महामारी से मुक्त होने का कोई मुगालता भी नहीं दिया । चीन से दवाइयों, इंजेक्शनों और आक्सीजन की कालाबाजार की खबरें भी नहीं है । इसके विपरीत खबर है कि वहां सरकार के सत्तारूढ़ पार्टी के करोड़ों कार्यकर्त्ता गांव-गांव और शहर-शहर में जाकर लोगों की सेवा जुटे हैं । भरत में क्या हुआ ? वेक्सीन बनाने वाला अदार पूनावाला सपरिवार विदेश भाग गया उसने विदेश में कहा कि देश के नेताओं ने उससके साथ दुर्व्यवहार किया है | अब खबर यह भी है कि उसने वेक्सीन बनाने वाली कम्पनी से अपनी भगीदारी बेच दी है |
ऐसे में देश में 130 करोड़ लोगों के वेक्सीन कब तक मिलेगी एक बड़ा सवाल है | भारत सरकार के एक मंत्री नितिन गडकरी ने इस संकट का हल के साथ क्या होना था साफ़ किया है | नितिन गडकरी ने साफ़ कहा “ वेक्सीन निर्माण का लायसेंस एक व्यक्ति को नहीं 10 कम्पनियों को देना चाहिए था | उनका सुझाव निर्माण तक है, सत्तारूढ़ भाजपा और उसे अदृश्य रूप से संचालन करने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को इसमें जुटना चाहिए था | संकट अभी टला नहीं ये काम अभी भी हो सकता है |
संघ के जो आंकड़े गूगल पर उपलब्ध है, उसके अनुसार देश में 550000 शाखाएं हैं और इनसे कोई 60 लाख स्वयंसेवक जुड़े हैं | वेक्सीनेशन के काम के लिए एक सप्ताह का प्रशिक्षण पर्याप्त होता है | संघ प्रमुख जब 3 सप्ताह के प्रशिक्षण के बाद स्वयंसेवक को सीमा पर तैनाती की बात कह सकते हैं तो मानवता बचाने के लिए चल रहे युद्ध में यह सन्गठन चुप क्यों है ? अंक गणित का हिसाब जोड़ें तो 130 करोड़ जनता और 60 लाख स्वयंसेवक अर्थात अक वेक्सीनेटर को 216 लोगों को वेक्सीन देना है | सतर्कता और सजगता से यह लक्ष्य एक सप्ताह का है | बशर्ते आप के मन में सद्भाव हो |
चीनी नेताओं ने अपने टीके की बहुत तारीफें नहीं की । लगभग 100 देशों को चीनी टीके दिए हैं। कुछ से पैसे लिये, कुछ को मुफ्त में दिए। अफ्रीकी और हमारे कुछ पड़ौसी देशों में चीनी टीके के दो-दो डोज़ लेकर लोग सुरक्षित अनुभव कर रहे हैं। चीनी टीका सस्ता और सुलभ है। सबसे बड़ी खबर यह आई है कि चीन ने पिछले नौ दिन में 10 करोड़ टीके अपने नागरिकों को लगा दिए हैं। अब तक चीन अपने लोगों को 40 करोड़ टीके लगा चुका है। इतने टीके तो अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी ने भी कुल मिलाकर नहीं लगे हैं। एक दिन में सवा करोड़ लोगों को टीका लगाना अपने आप में एक मिसाल है।
जो काम चीन ने किया, वह भारत भी कर सकता है लेकिन उसके लिए हमारी जनता और सरकारों में दृढ़ संकल्प शक्ति की आवश्यकता है।उनके साथ संघ के स्वयंसेवक जुटे तो और बेहतर | हमारे पास लगभग 60 लाख स्वास्थ्यकर्मी हैं, 20 लाख सेना के जवान हैं और इतने राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। यदि सबको सक्रिय करनेवाला कोई महान नेता देश में हो तो सिर्फ कुछ हफ्तों में ही सारे नागरिकों को टीके लगाए जा सकते हैं। टीका लगाने का प्रशिक्षण देने में कितनी देर लगती है ?
सरकार की आलोचना करने के अलावा आपातकाल में देश के लिए बहुत जूच स्वमेव किया जा सकता है | जरूरत चेतना की है | शुद्ध मानवीय और राष्ट्रीय चेतना |
राकेश दुबे

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