BREAKING
जवाहर नवोदय विद्यालय से दो छात्र लापता | एमपी में बड़ा प्रशासनिक फैसला | जबलपुर में सनसनीखेज वारदात
कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा हरियाली लाने हेतु बनाए जा रहे बीज बम... - revanchal times new

revanchal times new

निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

Breaking

aaj ka akhbar padhen

आज का ई-पेपर

पूरा अखबार पढ़ने के लिए नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें।

ई-पेपर Viewer

Thursday, May 13, 2021

कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा हरियाली लाने हेतु बनाए जा रहे बीज बम...



रेवांचल टाईम्स :- कृषि विज्ञान केन्द्र मण्डला के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डाॅ. विषाल मेश्राम ने बताया कि मिट्टी और कंेचुआ खाद्य गोबर में पानी मिलाकर एक गंेद या गोला बनाकर स्थानीय जलवायु और मौसम के अनुसार उस गोले में कुछ बीज डाल दिए जाते है इस बम को जंगल में या किसी भी खाली जगह में फेंक दिया जाता है या अनुकूल स्थान पर छोड दिया जाता है। अनुकूल परिस्थितियों में बीजों में अंकुरण होकर वृक्ष तैयार हो जाते है इसे बीज बम नाम इसलिए दिया गया है ताकि इस तरह के अटपटे नाम से लोग आकर्षित हो और इस बारे में जानने का प्रयास करे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सम्पूर्ण विष्व में कोरोना संक्रमण काल के दौरान लोगो ने आॅक्सीजन के महत्व को समझा है यह आॅक्सीजन हमें प्राकृतिक रूप से पेड-पौधों द्वारा निःषुल्क प्राप्त होती है परंतु अंधाधूंध विकास की होड के परिणाम स्परूप निरंतर वृक्षों की कटाई से हमारे आॅक्सीजन दाता की संख्या में तेजी से कमी आ रही है। वर्तमान समय में आॅक्सीजन की कमी के कारण त्राही-त्राही मची हुई है। अतः पर्यावरण सम्पूर्ण मानव जाति पषु पक्षी के संरक्षण हेतु वृक्षारोपण किया जाना नितांत आवष्यक है। बीज बम के द्वारा वृक्षारोपण की एक शुन्य बजट आधारित छोटी पहल कारगर साबित हो सकती है। 

कृषि विज्ञान केन्द्र मण्डला के वैज्ञानिकों द्वारा वृक्षारोपण हेतु बीजो के प्रसारण के लिए सीड बाॅल या जिसे बीज बम कहते हैं बनाया जा रहा है जिसका प्रयोग मानसून आने के पष्चात् जून-जुलाई में किया जाना है। जापान और मिश्र जैसे देशों में यह तकनीकी सीड बॉल के नाम से सदियों पहले से परंपरागत रूप से चलती रही है। यह नामकरण अपने उद्देश्य में पूरी तरह से सफल रहा है। कृषि विज्ञान केन्द्र मण्डला के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डाॅ. विषाल मेश्राम ने बताया कि यह एक शून्य बजट अभियान है। इसमें मिट्टी और गोबर को पानी के साथ मिलाकर एक गोला बना दिया है और स्थानीय जलवायु और मौसम के अनुसार उस गोले में कुछ बीज डाल दिये जाते हैं। इस बम को जंगल में कहीं भी अनुकूल स्थान पर छोड़ दिया जाता है। बीज बम में अल्पकालीन और दीर्घकालीन दोनों तरह के बीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं। अल्पकालीन बीजों में कद्दू, मटर, लौकी, मक्का जैसी मौसमी सब्जियों और अनाजों के बीज शामिल हैं, जो एक या दो महीने में खाने के लिए तैयार हो जाते हैं। दीर्घकालीन बीजों में स्थानीय जलवायु के अनुसार आम, जामुन, शहतूत, नीम, मुनगा, कटहल आदि के बीज शामिल किये जा सकते हैं। विकास कार्यों के चलते अब हरे-भरे पौधे और वृक्ष लुप्तप्रायः वस्तु बनते जा रहे हैं। यूएनईपी की एक रिपोर्ट बताती है कि बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में हमारी धरती की सतह (भूमि) पर लगभग 7.0 अरब हेक्टेयर भूमि पर वन थे और 1950 तक वन्यावरण घटकर 4.8 अरब रह गया था। अब आंकड़े बता रहे हैं कि वन घटकर 2.35 अरब ही रह गए हैं। डराने वाला तथ्य है कि प्रतिवर्ष 7.3 मिलियन हेक्टेयर उष्णकटिबंधीय वन समाप्त हो रहे हैं और प्रति मिनट 14 हेक्टेयर नियंत्रित वन समाप्त हो रहे हैं। आधुनिकीकरण के दौर में होने वाले सतत बदलाव के साथ प्रकृति को बचाए रखने के लिए प्रकृति प्रेमियों ने अपने आसपास की हरियाली को बचाए-बनाए रखने के कई उपाय किए हैं।आज के नए जमाने में सीड बॉलिंग या सीड बॉमिंग एक ऐसा ही क्रांतिकारी विचार है। एक जापानी किसान मासानोबू फुकुओका ने इसे लोकप्रियता दिलाई और उन्होंने इसका उपयोग अपने खेतों में खाद्य उत्पादन को बढ़ाने की तकनीक के तौर पर किया। इस तरह सीड बॉलिंग या सीड बॉमिंग दुनिया के कई देशों में प्रयोग किया जा रहा है। वृक्षारोपण में जहाॅ काफी समय और राषि का व्यय होता है वहीं अतिरिक्त विकल्प के रूप में इस विधि का आसानी से प्रयोग किया जा सकता है। इस हेतु केन्द्र के वैज्ञानिकों डाॅ विषाल मेश्राम, डाॅ. आर.पी. अहिरवार. डाॅ. प्रणय भारती, श्री नीलकमल पन्द्रे, कु. केतकी धूमकेती द्वारा केन्द्र में स्वयं निर्माण किया जा रहा है साथ ही इसके लाभ और विधि से जिले के कृषकों को परिचित करवाया जा रहा है ताकि वर्षा ऋतु में इसका अधिक से अधिक उपयोग हो पाये और हमारा जिला हरा-भरा हो सके।

No comments:

Post a Comment