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लोन वसूली से लोग हो रहे हैं परेशान घरों में भेज रहे हैं असामाजिक तत्वों को वसूली के लिए...

                                   



रेवांचल टाईम्स :- जहाँ पूरा देश कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा साथ ही लोगो के पास अपने जीवन यापन ले लिए सब काम धंधा बन्द वही लोगों के पास खाने पीने तक समस्याओं के समाना करना पड़ रहा है वही दूसरी तरफ लोगो द्वारा लिए गए प्राइवेट बैंको और NGO से लिया गया लोन अब जीना दूभर हो रहा है। वही लोन के वसूली वाले लोग घरों में पहुंचकर धमकी भी दे रहे है और फोन लगाकर परेशान भी कर रहे हैं कई लोगों की शिकायतें आ रही है साथ ही साथ बार-बार ईसीएच लगा देते हैं जिसकी वजह से लोगों के पास से 590 प्रति (ई सी एच) रांशी कट रहे है और कई बार ech  लगा रहे हैं महीने में आठ-दस बार (ईसीएस) लगाते हैं जिससे लगभग तीन हजार से ₹4000 कट जाते हैंऔर उसके साथ बैंक भी अपनी चार्जेस को काट रहे हैं एवं लोगों के सिविल खराब कर रहे हैं? वर्तमान स्थिति में कहीं घरों में मातम का माहौल है लोग अपना इलाज करवा कर सब कुछ लुटवा चुके हैं और उनके खाने के लाले पड़े हैं वही यह सुखी लाला सरकारी ठप्पा लगाये वसूली की दुकानदारी चालू है वहां पर भी किसी भी प्रकार से कोई भी ढिलाई नहीं बरती जा रही लोगो कोरो ना महामारी के चलते लोगों के घरों में आर्थिक स्थिति अत्यधिक खराब है लोग बेरोजगारी के कारण अपना घर ही नहीं चला पा रहे हैं तो इस वक्त की लोन की किस्तें कैसे भरेंगे! सरकारी लोगों को तो कोई फर्क पड़ता नहीं है परंतु प्राइवेट एवं व्यवसाय लोगों को बहुत ज्यादा फर्क पड़ता है ना जाने वर्तमान भयानक परिस्थिति मैं कब किस क्या कैसी स्थिति आ जाए लोग चारों तरफ से परेशान हो रहे हैं वर्तमान में सरकार सिर्फ बातें कर रही है इस और कोई ध्यान नहीं दे  रही है ?जनप्रतिनिधि जो करोड़ों के मालिक है उन्हें इससे क्या फर्क पड़ता मिडिल क्लास और गरीब क्लास के लोग सब तरफ से मर रहे हैं दूसरी ओर महंगाई को बढ़ाते जा चले जा रहै है लोगों की नौकरियां चली जा रही है व्यवसाय बंद है प्राइवेट लोन प्रोवाइडर सबसे ज्यादा लोगों को परेशान कर रहे हैं वर्तमान सरकार में इन को फायदा पहुंचाने के लिए टोटल लॉकडाउन इसलिए ही नहीं लगाया गया है क्योंकि इनकी वसूली चलती रहे और इनकी मनमानी चलती रहे हैं सरकार को भी फायदा होता है इसलिए कोरो ना कर्फ्यू का नाम देकर लोगों को बेवकूफ बनाया जा रहा है इसलिए इसलिए रुक रुक कर बंद की घोषणा की जाती है आम लोग को  बेवकूफ बना रहे हैं  पिछले वर्ष चुनाव थे इसलिए यह सब ड्रामा किया गया था कि लोगों की 3 महीने की (एई एम आई) छूट दी गई थी परंतु फिर भी प्राइवेट बैंकों ने और कंपनियों ने लोगों का सिविल खराब कियाथा  स्कूल फीस की वसूली और सरकारी वसूली अभी भी चालू है किसी भी प्रकार से कोई रियायत नहीं दी जा रही है लोग खून के आंसू रो रहे हैं सारे लोग अपनी पीठ थपथपा ने में लगे हैं चाहे वह प्रशासनिक अधिकारी हो चाहे वह राजनीतिक लोग हो धरातल के मामलों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा प्राइवेट लोन कंपनी में जॉब करने वाले पर ऊपर से प्रेशर बनाया जा रहा है उनकी भी जान माल डर नहीं है युवावस्था के लोगों पर एसी में बैठे अधिकारी धमकी देकर वसूली करने का अभियान चलाते हैं शासन प्रशासन और भारत सरकार से निवेदन है कि इस और अवश्य ध्यान दें और लगभग 6 महीने की छूट दिया जावे क्योंकि वर्तमान में पहले से अधिक कोरोनावायरस की स्थिति खराब है पिछले वर्ष से अधिक मृत्यु किस वर्ष हुई है थर्डवेव आने का भी डर है वरना जनता आने वाले चुनाव में सबक सिखाने में कोई कोताही नहीं बरतेगी।

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