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Sunday, May 2, 2021

संयुक्त किसान मोर्चा, मध्यप्रदेश की ऑनलाइन किसान मजदूर महापंचायत संपन्न हुई असंगठित श्रमिकों का पंजीयन किया जाना जरूरी...



रेवांचल टाईम्स :- गांवों में कोरोना संक्रमण की जांच की कोई व्यवस्था नहीं संयुक्त किसान मोर्चा, मध्य प्रदेश की ऑनलाइन किसान मजदूर महापंचायत  सम्पन्न हुई। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा मई दिवस को किसान मजदूर एकता दिवस के तौर पर मनाया गया । ऑनलाइन किसान मजदूर महापंचायत करने का मकसद तीनों किसान विरोधी कानूनों को रद्द कराने , बिजली संशोधन बिल 2020 वापस कराने तथा श्रमिकों के 44श्रम कानूनों को खत्म कर 4लेबर कोड लागू करने के खिलाफ देश भर में चल रहे  किसान और मजदूरों के आंदोलन की जानकारी अधिक से अधिक किसानों, मजदूरों एवं आम नागरिकों तक पहुंचाना है। 

              महापंचायत का संचालन किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष पूर्व विधायक डॉ सुनीलम ने किया। संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े प्रदेश के विभिन्न  किसान मजदूर संगठनों से जुड़े नेताओं के अपने  विचार रखे।ऑनलाइन किसान महापंचायत को बड़वानी से नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर, ग्वालियर से ऑल इंडिया किसान सभा के बादल सरोज, छिंदवाड़ा से किसान संघर्ष समिति की उपाध्यक्ष एड आराधना भार्गव, 

 भोपाल से अखिल भारतीय किसान सभा(अजय भवन) के प्रहलाद दास बैरागी, भोपाल से किसान जागृति संगठन के इरफान जाफरी, भोपाल से क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के बाबू सिंह राजपूत, रीवा से शहीद राघवेंद्र सिंह किसान संघर्ष समिति के इंद्रजीतसिंह, झाबुआ से जाग्रत आदिवासी दलित संगठन की माधुरी बहन, खरगौन से श्रमिक जनता संघ के संजय चौहान, सागर से भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति युनियन संदीप ठाकुर, मंडला से अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के विजय कुमार, जबलपुर से बर्गी बांध विस्थापित संघ के राजकुमार सिन्हा, 

 नरसिंहपुर से भारतीय किसान युनियन के बाबूलाल पटेल, 

इंदौर से भारतीय किसान एवं मजदूर सेना के बबलू जाधव, 

.छतरपुर से किसान क्रांति के दिलीप शर्मा , बालाघाट से किसान गर्जना के अरविंद चौधरी, अलिराजपुर से एनएपीएम के कृपाल सिंह मंडलोई, सिवनी से किसान नेता राजेश पटेल, मुलताई से भागवत परिहार आदि किसान नेताओं ने संबोधित किया । उत्तराखंड से किसंस के जबरसिंह वर्मा,पूणे से लता प्रतिभा मधुकर ने भी किसान मजदूर महापंचायत को संबोधित किया। 


सँयुक्त किसान मोर्चा सिवनी की ओर से जारी प्रेसनोट में आंदोलन के मीडिया सह प्रभारी मोनू राय ने बताया कि सिवनी जिले सहित मध्यप्रदेश के अन्य जिलों में किसानों को गेहूं उपार्जन में आ रही परेशानियों को लेकर किसान संघर्ष समिति की उपाध्यक्ष अधिवक्ता आराधना भार्गव ने  कहां है कि सरकार उपार्जन के बहाने तत्कालीन काँग्रेस सरकार की किसान कर्ज माफी योजना के कारण डिफाल्टर हुए किसानों से चक्र वृद्धि ब्याज के साथ वसुली कर रही है जिसके  कारण किसान सहमा हुआ है सरकार को तत्काल कर्ज वसूली रोक उपज के दाम पूरे खाते में डालना चाहिए वही सिवनी से किसान नेता राजेश पटेल ने उपार्जन हेतु छोड़े जा रहे मैसेज की एक सप्ताह की वैधता का विरोध किया है जिनने बताया कि किसान अपनी उपज लेकर ट्राली में पहुँच रहा जहां अधिक मात्रा में मैसेज किसानों को पहुँच जाने से ट्रैक्टर ट्रालियों की संख्या  1000 तक हो जा रही एक सप्ताह में किसान एक ट्राली गेहू तुलाई कर वापस अपने घर पहुँच रहा उपार्जन केंद्र में कोविड का पालन नही हो रहा जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है । अधिकारी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे।




 महापंचायत में निम्न प्रस्ताव पारित हुए-

 1. श्रमिक विरोधी 4 लेबर कोड रद्द किये जाए। काम का समय 8 घंटे किये जाए।

 2. मजदूरों का न्युनतम वेतन बढ़ाया जाए।

 3. असंगठित श्रमिकों का पंचायत स्तर पर पंजीयन का कार्य ऑनलाइन या ऑफलाइन कराया जाना चाहिए।

 4. लॉकडाउन के समय श्रमिकों को दस हजार रू प्रति माह आर्थिक मदद दी जाए।

 5. अस्पतालों में ऑक्सीजन, दवाई, वेंटिलेटर पर्याप्त मात्रा में उप्लब्ध करायी जाए। निजी ऑक्सीजन निर्माता कंपनियों का अधिग्रहण कर सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति कराई जाए।  ऑक्सीजन तथा दवाइयों की कालाबाजारी करने वालों पर कड़ी कार्यवाही की जाए।

 6. लॉकडाउन में मंडियां बंद होने से किसान अपनी उपज बेच नही पा रहे है। महामारी से पीड़ित किसान पैसे के अभाव में ईलाज तक नही करा पा रहे है।

 7. कोरोना संक्रमण गांव गांव पंहुच गया है। गांवों में कोविड की जांच और उपचार कराने के कोई संसाधन नहीं है। जिससे संक्रमण तेजी से फैल रहा है। गांव स्तर पर तत्काल ईलाज की व्यवस्था की जाएं।

 8. मजदूरों के पलायन रोकने के लिए मनरेगा के कार्यदिवस 200 दिन किए जाए तथा मनरेगा के तहत किसान के खेत मे वृक्षारोपण किया जाएं।

 9. मुख्यमंत्री कल्याण योजना की राशि तत्काल किसानों के खाते में डाली जाएं।

 10. प्रति पांच किलोमीटर पर शासकीय कृषि उपज मंडी खोली जाए।

 11. उड़ीसा,छत्तीसगढ़ की तरह वनोपज की एमएसपी पर खरीद की जाए।

 12. लॉकडाउन के कारण किसानों के फल, दूध तथा सब्जियों की खरीद बंद होने से हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए।

 13. कोरोना संक्रमण से हुई मौत पर उनके परिजनों को पच्चीस लाख रूपये मुआवजा दिया जाए।

 14. फसल उपार्जन के पंजीकृत किसानों की मृत्यु पर उसके परिजन से खरीद नही की जाती है। कृषक की मृत्यु के उपरांत परिजनों से फसल खरीद की जाएं।

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