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Wednesday, April 28, 2021

घरेलू नुस्खे से कोरोना मरीजों को ठीक कर रहे हैं बिलासपुर के एसडीएम आनंदस्वरूप, आप भी पढ़िए उनके उपचार की विधि

 



बिलासपुर। कोरोना संक्रमण के इस भीषण दौर के बीच बिलासपुर की यह खबर आपको राहत देगी। कोरोना महामारी के कारण जहां मानवता का गला घुटता दिख रहा है, अपनों से ही अपने ही दूर दिख रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बीमार मरीज को छूने से भी लोग अब परहेज करने लगे हैं औऱ अस्पताल के भरोसे छोड़कर ईलाज करा रहे हैं। अजीब दशा है कि मौत होने पर शव को अग्नि देने देने से भी लोग इंकार करने लगे हैं। ऐसे लोगों के लिए बिलासपुर में पदस्थ एक राज्य प्रशासनिक अधिकारी मिसाल हैं और मानवता को जीवित रखने वाले एक उदाहरण बनकर उभरे हैं। वे अब तक आधा दर्जन से अधिक परिवार वालों को कोरोना की जंग जीता चुके है और अधिकांश लोग उनका अब अनुसरण करने लगे हैं।

वर्तमान समय में चारों ओर कोरोना महामारी के प्रसार तथा इसके कारण होने वाली अप्रिय घटनाओं ने लोगों के मन में डर कायम कर दिया है। प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति अस्पताल में भर्ती होना चाहता है तथा उसके परिवारजन भी इसके लिए प्रयास करते हैं। ऐसे समय में तखतपुर एसडीएम आनंदरूप तिवारी ने एक मिसाल प्रस्तुत की है और अपने कोरोना पॉजिटिव परिजनों का होम आइसोलेशन में उनका इलाज कराया है, ताकि ऐसे लोगों को हॉस्पिटल में बेड उपलब्ध हो सकें, जिन्हें अत्यधिक आवश्यकता है। यह सिलसिला शुरू हुआ जब आज से 3 माह पहले SDM आनंदरूप तिवारी की पत्नी विजयलक्ष्मी तिवारी कोरोना पॉजिटिव हुई थी। जिस पर SDM आनंदरूप तिवारी ने डॉक्टरों से परामर्श लिया और उनके द्वारा बताई गई सावधानियां बरतते हुए अपनी पत्नी की देखभाल प्रशासनिक सेवाएं की जिम्मेदारियां निभाते हुए की और उन्हें स्वस्थ कर लिया।

इसके लगभग 2 माह बाद SDM आंनदरुप तिवारी को खबर मिली कि उनकी पत्नी के मामा दिनेश उम्र 55 वर्ष निवासी पाटन विधानसभा का सीटी स्कैन स्कोर 11 आ चुका था। वे पाटन के महाविद्यालय में प्रोफ़ेसर हैं, उनको सांस लेने में तकलीफ हो रही है। उनका पाटन में देखभाल करने वाला कोई नहीं था, इसलिए SDM आनंदरूप तिवारी ने उन्हें बिलासपुर अपने घर बुला लिया। उनकी टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव थी, सीटी स्कैन से पता चला कि उनके फेफड़ों में 25% संक्रमण हो चुका है। SDM तिवारी ने तुरंत उन्हें एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया और 3 दिनों के बाद उनकी हालत को स्थिर होने पर उन्हें डिस्चार्ज करा लिया और होम आइसोलेशन में उनका उपचार चलता रहा। होम आइसोलेशन में डॉक्टरों द्वारा बताई गई दवाओं के साथ-साथ, काढ़ा, भाप, संतुलित आहार और हल्के योगाभ्यास को भी उनकी दिनचर्या में शामिल कराया। इसी तरह 10 से 12 दिनों तक इस दिनचर्या का पालन करने पर SDM तिवारी के मामा दिनेश की रिपोर्ट नेगेटिव आई और वे पूर्णतया स्वस्थ हो चुके हैं।

इसी बीच खबर मिली की SDM आनंदरूप तिवारी की नानी सास उर्मिला की भी तबीयत खराब है। उन्होंने तत्काल अपनी नानी को बिलासपुर बुलवाया, उनका कोरोना टेस्ट कराया। रिपोर्ट पॉजिटिव थी और फेफड़ों में इन्फेक्शन 40% था। उन्होंने डॉक्टरों से परामर्श लेकर और अपने पहले के अनुभव के आधार पर नानी का इलाज भी होम आइसोलेशन में कराने का निश्चय किया। 77 वर्षीय नानी को होम आइसोलेशन में रखने पर उन्हें डर भी लग रहा था, परंतु यह विश्वास भी था कि वह ठीक हो ही जाएंगी। सबसे पहले नानी की कमजोरी को देखते हुए उन्हें 4 दिन तक लगातार ताकत की बोतलें चढ़वाई, और स्थिति में सुधार होते ही उनकी दिनचर्या में डॉक्टरों द्वारा बताई गई दवाइयों के साथ-साथ काढ़ा, भाप, संतुलित आहार और हल्का योगाभ्यास तथा व्यायाम शामिल कराया। नानी उर्मिला की हिम्मत और आत्मविश्वास देखिए कि उनकी कोरोना टेस्ट रिपोर्ट नौवें दिन में ही नेगेटिव आ गई। वहीं SDM आनंदरूप तिवारी ने तीन लोगों का अपने घर पर ही होम आइसोलेशन में डॉक्टरों के परामर्श उपचार किया, साथ ही उन्होंने अपने मध्यप्रदेश के रीवा निवासी चचेरे भाई अर्पित, बहन सविता और दामाद को भी फोन पर मार्गदर्शन उपलब्ध कराया, जिसके फलस्वरूप वे लोग भी होम आइसोलेशन में ही कोरोना को मात दे चुके हैं। इस कार्य में उनकी पत्नी विजयलक्ष्मी तिवारी ने भी उनका साथ दिया।

इस संबंध में SDM आनंदरूप तिवारी कहते हैं कि जो भी लोग कोरोना पॉजिटिव हैं, उन्हें डरना बिल्कुल नहीं चाहिए। डॉक्टरों द्वारा बताई गई दवाइयों का नियमित सेवन करें। अपनी दिनचर्या में काढ़ा, भाप, संतुलित आहार और हल्का व्यायाम शामिल करें। ऐसा करने पर होम आइसोलेशन में ही कोरोना का इलाज संभव है। यदि किसी को भी कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत जांच कराएं, लापरवाही ना बरतें। आगे कहा कि कोरोना में काढ़ा पीना ही नही बल्कि उसे पीने की विधि है, गले में कुनकुने काढ़ा को कुछ समय तक रखकर गले को सें और धीरे-धीरे गटकें.. इसी तरह लौंग, इलाईची, कपूर तथा अजवायन की छोटी से पोटली बनाकर बारी-बारी नाक से सूंघे और मुंह से भी सांस के माध्यम से खींचे। वहीं हर दो तीन घंटे में भाप लेते रहना ही कोरोना के खिलाफ रामबाण नुस्खा है। इससे हिम्मत हारने का नहीं बल्कि सीखने की जरूरत है, और किसी की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर परिवार वालों का साथ छोड़ने के बजाए उनके मनोबल को बढ़ाएं और सावधानी से काम लें।

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