रेवांचल टाईम्स :- नैनपुर नगर के कुछ निजी स्कूल नर्सरी क्लास से आठवीं तक के बच्चों के वार्षिक परीक्षा परिणाम दिखाने के नाम पर अभिभावकों पर फीस जमा करने का दबाव बना रहे हैं। स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को स्कूल द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज के जरिए एवं रिजल्ट दिखाने के लिए विद्यालय बुलाकर फीस जमा करने को कह रहे हैं। और अभिभावक पर यह दबाव भी बनाया जा रहा है कि यदि पूरी फीस जमा नहीं की जाती है तो बच्चे को पास कर आगे क्लास में नहीं भेजा जाएगा चाहे छात्र गौरवशाली और पढ़ाई में प्रतिभाशाली ही क्यों ना हों इससे अभिभावक परेशान हो रहे हैं।
नैनपुर के एक निजी विद्यालय ने अभिभावकों से फीस जमा करवाने के लिए नई नीति अपनाई है। जो फीस जमा कराने के लिए अभिभावकों को परीक्षा परिणाम दिखाने से इंकार कर रहे हैं। नैनपुर के निजी स्कूल में पिछले दिनों कक्षा नर्सरी से लेकर आठवीं तक वार्षिक परीक्षाएं कराई गई। जिसका परीक्षा परिणाम दिखाने के लिए अभिभावकों को स्कूल के व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज के द्वारा सूचना दी गई एवं विद्यालय बुलाया गया। लेकिन पहले फीस जमा करने की बात कहकर वापस भेज दिया गया।
अभिभावकों का कहना है कि पिछले आठ माह से विद्यालय बंद हैं। ऐसे में किस विहाप पर पूरी फीस जमा करें। कोरोना काल में अभिभावक आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। दूसरी ओर विद्यालय पूरी फीस जमा करने का दबाव बना रहे हैं।
अभिभावकों ने आरोप लगाया कि नैनपुर के एक निजी स्कूल ने प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों का रिजल्ट रोक दिया है। अभिभावकों पर तुरंत फीस जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा है। और यहां तक भी कहा गया है कि यदि फीस नहीं जमा होती है तो बच्चे को आगे की क्लास में प्रमोट नहीं किया जाएगा बल्कि दोबारा उसी क्लास में प्रवेश दिया जाएगा।
अभिभावक ने कहा कि ऐसे कई बच्चे हैं, जिनके अभिभावक अलग-अलग कारणों से अब तक पूरी फीस जमा नहीं करा पाए हैं। अभिभावकों ने स्कूल को जल्द फीस जमा कराने का भरोसा दिया है लेकिन स्कूल प्रबंधन ने इसे मानने से इनकार कर दिया।
बता दें कि लॉकडाउन के दौरान जब तमाम काम-धंधे बंद हो गए थे, हजारों-लाखों लोग बेरोजगार हो गए थे, उस समय तमाम राज्यों की सरकारों ने निजी स्कूलों की फीस में कटौती को लेकर फरमान जारी किए थे. राज्य सरकारों ने निजी स्कूलों को ऑनलाइन क्लास के लिए केवल ट्यूशन फीस लेने और ट्यूशन फीस में भी कटौती करने के आदेश दिए थे.
इन आदेशों के खिलाफ अलग-अलग राज्यों की स्कूल एसोसिएशंस ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. कई राज्यों की हाईकोर्ट ने अभिभावकों को राहत देते हुए उन्हीं के पक्ष में फैसला सुनाया था. कुछ राज्यों की प्राइवेट स्कूल एसोसिएशंस ने हाईकोर्ट से मुंह की खाने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.
"सुप्रीम कोर्ट का साफ कहना है कि स्कूल फीस जमा नहीं कर पाने वाले स्टूडेंट्स को स्कूल से निकाला नहीं जा सकता है और न ही उनके एग्जाम रिजल्ट को रोका जा सकता है."
नैनपुर रेवांचल टाइम्स से शालू अली की रिपोर्ट


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