रेवांचल टाइम्स :- कोरोना वायरस के प्रभाव को रोकने के लिए मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार ने कोरोना कर्फ्यू (लॉकडाउन) लगाया गया है!लेकिन इसका सीधा प्रभाव गरीब मजदूर वर्ग एवं निम्न वर्ग के परिवार पर पड़ा है।
गरीब मजदूरों और निम्न वर्ग को अधिक परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। ये वो मजदूर निम्न वर्ग के लोग हैं, जो कहीं फैक्ट्री, बिल्डिंग निर्माण, मजदूरी, रिक्शा चालक, और अन्य दिहाड़ी मजदूरी करते थे। इसमें भी सबसे अधिक संख्या उन लोगों की है, जो प्रवासी मजदूर हैं, जो जो हमारे मंडला जिले से जाकर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल जैसे महानगरों में कार्य करते हैं। भारत में 85 प्रतिशत लोग इसी असंगठित क्षेत्र के अंतर्गत कार्य करते हैं।
इन लोगों की आजीविका रोज कमा के खाने पर निर्भर होती है। नोटबंदी ने इन मजदूरों को लाइन में लगने को मजबूर किया, जिससे इनको काफी संकटों का सामना करना पड़ा था। एकबार फिर उसी प्रकार की अव्यवस्था हमे इस समय प्रदेश में देखने को मिली।
कोरोना कर्फ्यू लगाने के बाद भी प्रदेश के हर जिले में रोजाना संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ रही है, मौत का आंकड़ा भी निरंतर बढ़ता जा रहा है।
तो हमने कर्फ्यू लगा कर भी कौन सा स्थिति पर काबू किया है। बल्कि अब इस कर्फ्यू से गरीब मजदूर और निम्न वर्ग की आर्थिक परेशानियां बढ़ रही है जमा पूंजी का भी सहारा नहीं है। क्योंकि पिछले लाक डाउन में लोगों की जमा पूंजी खत्म हो चुकी है,
जैसे तैसे पुनः अनलॉक में लोगों ने व्यापार संभाला, मजदूरी करना प्रारंभ किया, निम्न वर्ग परिवार के लोगों ने अपने काम पर जाना प्रारंभ, किया तो अपनी विफलता को छुपाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने पुनः लॉकडाउन को कोरोना कर्फ्यू का नाम देकर प्रदेश में लागू कर दिया।
और जनता की परेशानियों को बढ़ा दिया।
बल्कि स्वयं प्रदेश में हो रहे दमोह विधानसभा उपचुनाव में रेलिया कर रहे हैं ,और जनता को ट्विटर के माध्यम से गैर जिम्मेदाराना जवाब दे रहे हैं, कि वह घर से बाहर निकले और अधिक से अधिक मतदान करें।
इससे तो यही प्रतीत होता है कि मध्य प्रदेश सरकार को एवं मुख्यमंत्री शिवराज को जनता की मौत और जिंदगी से कोई सरोकार नहीं है।
उन्हें केवल सत्ता का मोह और लालच इस कदर है कि उन्होंने इस संक्रमण के चलते लोगों की जा रही जान को भी ताक पर रख दिया है।
इनके मंत्रिमंडल के मंत्री गैर जिम्मेदाराना जवाब देते हुए सोशल मीडिया में वीडियो के माध्यम से ट्रोल हो रहे हैं जिससे साफ नजर आता है कि इन्हें जनता की कितनी चिंता है।
तो फिर जनता बलिदान क्यों दे, आखिर क्यों इस तरह लोगों के काम धंधे और व्यापार को बंद किया गया है।
जबकि सरकार को उच्च स्वास्थ्य व्यवस्था, अधिक जांच ,एवं ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सिंन लगवाने पर फोकस करना चाहिए।
हर जिले के बॉर्डर को सील कर, केवल जिले में ही लोगों को आवागमन का आदेश दिया जाना चाहिए
दूसरे राज्यों से आ रहे लोगों को बिना किसी जांच के तब तक जिले में घुसने नहीं देना चाहिए,जब तक उनकी रिपोर्ट नेगेटिव ना आ जाए, एवं ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच की जाना चाहिए, और वैक्सीन लगाकर लोगों को स्वस्थ करने का प्रयास करना चाहिए,
आर्थिक मंदी से परेशान हो रहे व्यापारी गरीब मजदूर और निम्न वर्ग के लोगों को अपने-अपने प्रतिष्ठान खोलने की छूट देना चाहिए लेकिन नियम शर्तों का उल्लंघन ना करने पर।
नैनपुर रेवांचल टाइम्स से शालू अली की रिपोर्ट

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