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Wednesday, March 10, 2021

सूदखोरों के मकड़जाल में उलझा शहर न खाता, न बही, सूदखोर जो कहे, वही सही

 



रेवांचल टाईम्स :- ब्याज में पैसा देकर कर्जदार का सबकुछ लूट लेने वाले सूदखोरों का आंतक इन दिनों चरम पर है।ऐसा ही एक मामला चौरई नगर में प्रकाश में आया है सूत्रों के अनुसार विधानसभा क्षेत्र के एक सूदखोर ने प्रापर्टी डीलर को मोटी रकम ब्याज पर देकर उक्त जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करवा लिया व उक्त जमीन पर प्लाटिंग कर प्रापर्टी डीलर ने अन्य लोगों को प्लॉट बेच दिया जिसकी रजिस्ट्री करने में सूदखोर द्वारा आनाकानी करते हुए प्रापर्टी डीलर एवं उसके भाई के साथ तीखी बहस कर मारपीट की गई। प्रापर्टी डीलर का कहना है कि उसने  ब्याज से ली गई पूरी  मूल रकम ब्याज सहित चुका दिया है उसके बाद भी सूद खोर द्वारा उसे प्रताड़ित किया जा रहा है।जिसकी रिपोर्ट पुलिस थाना चौरई में की गई है। 

खासकर तब जब शिवराज में आम गरीब लोगों की जमीन हथियाने वाले बाहुबलियों, माफियाओं व डानों के खिलाफ कार्रवाई की डंका बज रहा है। हर कोई शिव की जयकारे लगा रहे है। लेकिन सूदखोर है कि शासन-प्रशासन के आंखों में धूल झोक खुलेआम निरीह गरीबों को लूट रहे है, धमकियाएं रहे है। आत्महत्या करने को विवश कर रहे है। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश के बाद भी बेलगाम सुदखोरों के खिलाफ कार्रवाई तो दूर उनके इशारे पर ग्रामीण अंचलों में नंगा नाच हो रहा है। या यूं कहे मनी लांड्रिंग जैसे एक्ट की धज्जियां उड़ाई जा रही 


क्षेत्र में ब्याज में रकम देकर कर्जदार से कई गुना पैसा वसूलने का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। हालांकि कोई इसकी शिकायत नहीं करता। परिणाम यह है कि सूदखोरी का अवैध धंधा व्यापक पैमाने पर फलफूल रहा है। साहूकारी का धंधा करने वाले लोग बिना लाइसेंस के सूद पर रुपया देते हैं। गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाकर आजीवन उनसे अवैध रूप से ब्याज वसूल करते हैं। ऐसे लोगों द्वारा वसूली के लिए अपराधियों को भी एजेंट रखा गया है, जो सूद पर उधार लेने वालों को डरा-धमकाकर, प्रताड़ित कर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का शोषण करते हैं। जब ब्याज व मूलधन की राशि समय पर नहीं लौटा पाने पर सूदखोरों के द्वारा जमीन, जायदाद सहित अन्य संपत्ति को गिरवी रख लेते हैं। हाल यह है कि आड़े वक्त में सूद पर रुपया उधार लेने वाले मुसीबतजदा लोगों को कर्ज लेने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़़ रही है। तो कुछ लोग जमीन-जायदाद से हाथ धो बैठते है। आलम यह है कि सूद पर कुछ हजार रुपए का कर्ज देकर सूदखोर, लोगों को इतना भयभीत कर देते हैं कि उन्हें अपनी महीने भर की कमाई का बड़ा हिस्सा चुकाना पड़ता है। ऐसे में गृहस्थी की गाड़ी लड़खड़ाने लगती है और सूदखोरों से भयभीत कर्जदार खुदकुशी पर मजबूर हो जाते हैं।


विडंबना है कि शहर में सूदखोरों के डर से आत्महत्या कर लेने के बावजूद पुलिस की कान में जूं तक नहीं रेंगती। किसानों को रकम देने के एवज में सूदखोर ज्यादा दर पर ब्याज लेतेे हैं। किसान किसी माह ब्याज नहीं जमा कर पाया तो उससे चक्रवृद्धि ब्याज वसूला जाता है। किसान उधार की रकम से ज्यादा ब्याज का भुगतान करने को मजबूर है। जबकि राज्य के पुलिस प्रमुख ने सभी पुलिस थानों को सूदखोरी पर रोक लगाने के लिए पासा, मनी लान्ड्रिग और गुंडागर्दी समेत कई धाराओं के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। लेकिन इसका असर सूदखोरों पर नहीं है। बता दें, 21वीं सदी में भी देश के कई हिस्सों में सूदखोरों का मकड़जाल फैला है। सरकार ने जनधन खातों की बात की। कहा कि अब देश के हर शख्स की पहुंच बैंक तक होगी। लेकिन देश की बड़ी आबादी आज भी लोकल महाजनों के भरोसे बैठा है। जिले में शहर से लेकर गांवों तक सूदखोरों का तगड़ा नेटवर्क है। इनकी नजर हमेशा जरूरतमंदों पर रहती है और इनके कारिंदे ऐसे लोगों की दुखती रग पर हाथ रखते हुए उन्हें अपने आका तक ले जाते हैं। अगर गिरवी रखने को कुछ न मिला, तब भी बनावटी दरियादिली दिखाते हुए कर्ज दिया जाता है। एक बार जिसने सूदखोरों से कर्ज ले लिया, फिर उससे उबरना आसान नहीं रहता। आखिर में उन्हें ब्याज चुका कर अपना सब कुछ गवां देना पड़ता है।


कहने को तो लिखा पढ़ी में निर्धारित दर पर ब्याज पर पैसा देने वाले सूचीबद्ध साहूकार हैं। यह सभी बैंक की निर्धारित ब्याज दर की तरह ही पैसा उधार देते हैं। लेकिन हकीकत में मनमाना ब्याज दर पर पैसा उधार देने वालों की संख्या हजारों लाखों में है। प्रतिमाह निर्धारित समय पर ब्याज और किश्त का पैसा न मिलने पर सूदखोर चक्रवृद्धि ब्याज वसूलते हैं और उधार लेने वाले के घर के कीमती सामान भी जबरन उठा ले जाते हैं। चौरई में ज्यादातार लोग सूदखोरों के जाल में फंसे हैं। सूदखोरों ने इन लोगों को पांच से दस प्रतिशत महीने ब्याज दर से पैसा दे रखा है। इनमें ज्यादातर अवैध रूप से सूदखोरी का धंधा कर रहे हैं। इनके चंगुल में फंसे कुछ लोग तो ऐसे हैं, जिन पर इस कदर ब्याज चढ़ गया है कि अब उसे चुकाना उनके लिए मुश्किल है। चौरई नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों  में सूदखोरी का धंधा बेरोकटोक चल रहा है। सूदखोरों के चंगुल में फंसने के बाद कम ही कर्जदार उनके जंजाल से बाहर आ पाते हैं। अधिकतर तो ब्याज ही भरते रह जाते हैं। सूदखोर रकम और ब्याज की वसूली के नाम पर कर्जदार को जमकर लूटते हैं। कई बार तो ब्याज इतना ज्यादा हो जाता है कि कर्जदार का जेवर, मकान, प्लाट तक सूदखोर हथिया लेते हैं। चौरई में सूदखोर लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन पर सितम ढहा रहे हैं। चौरई विधानसभा क्षेत्र में सूदखोरों का बोलबाला है। यहां सूदखोरों द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न के कारण भी आत्महत्याओं की संख्या में वृद्धि हुई है।


सूदखोरी के लिए पंजीयन जरूरी

 सूदखोरी का व्यवसाय विभिन्न कानूनों के अधीन हो सकता है। मनीलैण्डर्स एक्ट, 1934 लागू है, जिसके अन्तर्गत 11(ए), 11(बी), 11(बीबी), 11(सी), 11(डी) और 11(ई) के तहत सूद में रुपए देने का व्यवसाय करने वाले व्यक्ति (मनी लैण्डर्स) का पंजीयन जरूरी है। इसके अलावा धारा-3 के तहत उन्हें खाता संधारण करना तथा उसको कर्ज लेने वाले व्यक्ति को देना आवश्यक है। यदि बिना लिखा-पढ़ी के कोई कर्ज दिया गया है, तो उसके संबंध में भी इन नियमों में उल्लेख किया गया है। धारा 11(एफ) के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति मनी लैंडिंग का व्यवसाय, बिना वैध पंजीयन प्रमाण-पत्र के नहीं कर सकता और ऐसा करने वाले व्यक्ति सजा के पात्र होंगे। ब्याज का अवैध कारोबार करने वाले व्यक्तियों की सूची ग्राम सभाओं में आम जनता के सामने पढ़ी जाना चाहिए। ताकि ग्रामीणों को सतर्क किया जा सके। वहीं इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए शासन द्वारा विशेष अभियान चलाया जाए। सूदखोरी के गैर कानूनी व्यवसाय की रोकथाम के लिए एक्ट है। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निगरानी किया जाना है, लेकिन सब कागज पर ही है

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