रेवांचल टाईम्स :- कुछ माह पहले थाना प्रभारी शशि विश्वकर्मा की विवेचना से बहुचर्चित जमुनिया काण्ड में आरोपी को मिल चुकी है मृत्युदंड की सजा
3 माह के अंदर दो जघन्य सनसनी प्रकरणों का निराकरण माननीय अपर सत्र न्यायालय अमरवाड़ा द्वारा किया गया,
मई 2020 में एक *प्रकरण पर
मोनू उर्फ शरद डेहरिया पाया गया दोषी,आजीवन कारावास सहित ₹1500 का अर्थदंड"
न्यायालय ने मामले की गंभीरता* *एवं जघन्य सनसनी खेज को देखते हुए निरंतर 194 दिनों तक कोरोना काल में सुनवाई की
अपर सत्र न्यायालय श्रीमती निशा विश्वकर्मा अमरवाड़ा के द्वारा थाना हर्रई के अपराध क्रमांक 113/2020, धारा 366(A),376,376(A)(B),376(2)N तथा धारा 4,3,6 (पोक्सों एक्ट) बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012, के आरोपी मोनू उर्फ शरद पिता दशरथ डेहरिया थाना हर्रई को धारा 376(AB)मे दोषी पाते हुए आजीवन कारावास शेष प्राकृत जीवन तक की कठोर कारावास और1500 ₹ के अर्थदंड एवं धारा 366 भा द वि मे 7 वर्ष की कठोर कारावास एवं ₹500 जुर्माना से दंडित किया गया।
इस पूरे मामले पर तत्कालीन अमरवाड़ा व वर्तमान में चौरई थाना प्रभारी शशि विश्वकर्मा द्वारा विवेचना की गई थी।
थाना हर्रई के जघन्य सनसनी मामले का हुआ फैसला
अपर सत्र न्यायालय अमरवाड़ा के द्वारा थाना हर्रई के अपराध क्रमांक 113/2020 के आरोपी मोनू उर्फ शरद पिता दशरथ डेहरिया उम्र 29 वर्ष थाना हर्रई को धारा 376(AB)मे दोषी पाते हुए आजीवन कारावास से जो शेष प्राकृत जीवन तक कठोर कारावास से और1500 ₹ के अर्थदंड एवं धारा 366 भादवि मे7 वर्ष की कठोर कारावास एवं ₹500 जुर्माना से दंडित किया गया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता एवं जघन्य सनसनी खेज को देखते हुये निरंतर 194 दिनों तक कोरोना काल में सुनवाई की।उक्त प्रकरण में अभियोजन की ओर से 21 अभियोजन साक्षी के साक्ष्य न्यायालय में कराये गये तथा DNA रिपोर्ट प्रदर्श कराये जाने हेतु डॉ0 पंकज श्रीवास्तव वैज्ञानिक अधिकारी, सहायक रासायानिक परीक्षक राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोग शाला सागर को विशेष रूप से बुलाया गया था।
घटना का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:-कि नाबालिग पीड़िता जिसकी उम्र 5 वर्ष अपने दादा दादी के साथ में निवास करती है प्रकरण में घटना दिनांक 05-05-2020 के 12:00 बजे दोपहर से 03:00 बजे के बीच की है आरोपी मोनू उर्फ शरद ने नाबालिक पीडिता से बोला कि चल बस्ती वाले घर मे नल आ गये है वही से नहाकर घर आ जाएगे कहकर नाबालिग पीड़िता को बहलाफुसलाकर ले गया। फिर 03:00 बजे नाबालिग पीड़िता अकेली घर आई तो परेशान थीऔर अपनी दादी के पास आकर सो गई। जब 05:00 बजे शाम को नाबालिग पीड़िता सोकर उठी तो दर्द हो रहा था तो दादी के पूछने पर घटना के बारे में बताया कि आरोपी मोनू उर्फ शरद ने अपनी घर की परछी में रखे पंलग में मुझे सुलाकर मेरे साथ गलत काम किया उस समय नाबालिग पीड़िता के पिता भोपाल काम करने गया था एवं नाबालिग पीड़िता की मां अपनी मां के साथ नागपुर में थी। नाबालिग पीड़िता की दादी के द्वारा थाना हर्रई में जाकर आरोपी के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट लेख कराई। थाना हर्रई द्वारा विवेचना पूर्ण कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। उक्त प्रकरण जघन्य सनसनी का होने से उक्त प्रकरण की निगरानी विजय यादव संचालक लोक अभियोजन (आईपीएस) एवं विवेक अग्रवाल पुलिस अधीक्षक (आईपीएस) द्वारा प्रकरण की सतत् मानीटिरिंग की गई एवं मामले में तत्कालीन अमरबाडा टी आई शशि विश्वकर्मा के कुशल नेतृत्व में विवेचना की गई। उप संचालक श्रीमान गोपाल कृष्ण हलदार, समीर पाठक जिला अभियोजन अधिकारी के दिशा निर्देश पर श्री दिनेश उइके, लोकेश घोरमारे, संजय शंकर पाल विशेष लोक अभियोजक द्वारा पैरवी की गई। उक्त प्रकरण में पीडिता को धारा 357 द.प्र.स. के तहत प्रतिकर राशि न्यायालय द्वारा पीडिता को दिलाये जाने के भी आदेश दिये गये। माननीय न्यायालय द्वारा मात्र 3 माह के अंदर जघन्य सनसनी प्रकरण का निराकरण माननीय अपर सत्र न्यायालय अमरवाडा द्वारा किया।

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