रेवांचल टाइम्स - नटेरन प्रति वर्ष अनुसार इस वर्ष भी ग्राम सेवा में श्री रामलीला मेले का आयोजन बड़े हर्षोल्लास के साथ स्थानीय कलाकारों द्वारा किया गया आज सेतु बांध रामेश्वर लीला का शानदार मंचन किया गया रामलीला समिति द्वारा रामलीला प्रांगण के पास बने तालाब पर लकड़ी की बल्लियों एवं पटियों के सहारे से सेतु बांध का निर्माण किया गया जिसकी सभी जन मानस ने रामलीला समिति की खूब सराहना की !!भगवान राम का सु्ग्रीव से मित्रता होने के बाद हनुमान जी वानरों की टोली लेकर सीता की खोज में चल पड़े। जब पता चल गया कि सीता को लंका का राजा रावण हरण करके ले गया है तो सबसे बड़ी चुनौती थी। वानर सेना को लेकर 1500 किलोमीटर लंबे समुद्र को किस तरह पार किया जाए।
बहुत सोच विचार करने के बाद यह तय हुआ कि समुद्र पर पुल बनाया जाए। बाल्मिकी रामायण के अनुसार भगवान राम ने सबसे पहले सागर का निरिक्षण किया की किस स्थान से पुल बनाना आसान होगा। इसके बाद पुल का निर्माण कार्य आरंभ हुआ।
लेकिन परेशानी यह आई कि जो भी पत्थर समुद्र में डाले जाते सभी डूब जाते। इससे वानर सेना में निराशा बढ़ने लगी। तब भगवान राम ने सागर से प्रार्थना शुरू की। सागर से कहा कि वह पुल निर्माण के लिए फेंके गए पत्थरों को बांधकर रखे। लेकिन सागर ने विनती नहीं सुनी।
भगवान राम को इससे सागर पर क्रोध आ गया। राम ने अपने दिव्य वाण को जैसे ही धनुष पर चढ़ाया सागर भागकर श्री राम के चरणों में आकर गिर पड़ा और क्षमा मांगने लगा। भगवान राम ने सागर को क्षमा दान दिया। सागर ने कहा कि आपकी सेना में नल और नील नाम के दो वानर हैं।
यह भगवान विश्वकर्मा के पुत्र हैं और विश्वकर्मा के समान ही शिल्पकला में निपुण हैं। इनके हाथों से पुल का निर्माण करवाइए, मैं पत्थरों को लहरों से बहने नहीं दूंगा राम ने नल और नील के हाथों पुल निर्माण का काम शुरू करवाया। नल और नील को वरदान प्राप्त था कि उनके हाथों से फेंका गया पत्थर पानी में डूबेगा नहीं। बस फिर क्या था देखते ही देखते वानर सेना ने महज पांच दिनों में लंका तक पुल का निर्माण कर दिया।उधर लंका में रावण इस खुशफहमी में जी रहा था कि सागर पर पुल बनाने में राम असफल होंगे लेकिन जब राम के पुल बनाकर लंका पहुंचने की खबर जब रावण को मिली तो उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा रावण को लगने लगा कि अब युद्घ निश्चित है इसलिए सेना तैयार करने में जुट गया।
रेवांचल टाइम्स से हेत सिंह रघुवंशी की रिपोर्ट

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