रेवांचल टाईम्स :- नाट्यगंगा छिंदवाड़ा के द्वारा स्वामी विवेकानंद जयंती युवा दिवस के अवसर पर स्वामी विवेकानंद के विचारों एवं सीखों को युवाओं तक पहुंचाने के लिए नुक्कड़ नाटकों के मंचन किए गए। समीपस्थ ग्राम सांख जटामा, उमरहार और चारगांव में नाट्यगंगा के कलाकारों दानिष अली, प्रहलाद उइके, स्वाति चौरसिया, प्रांशुल जुनगरे, विनोद ग्यास, अर्पणा पाटकर, श्रुति विश्वकर्मा, ऋषभ शर्मा , हेमंत नांदेकर एवं सचिन वर्मा ने रोचक नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन किया गया। इस नाटक का निर्देशन स्वाति चौरसिया ने किया। नाटक में कलाकारों ने स्वामी विवेकानंद के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला एवं उनकी द्वारा कही गई महत्तवपूर्ण बातों को उपस्थित दर्षकों को बताया। साथ ही युवाओं को युवा दिवस पर किस तरह अपने कैरियर पर ध्यान देना चाहिए और वर्तमान समय को देखते हुए युवाओं को किस तरह का आचरण करना चाहिए आदि कई बातों को समझाया गया। नाटक में बताया गया कि विवेकानंद जी ने कहा है कि कोई व्यक्ति कितना ही महान क्यों न हो, आंखे मूंदकर उसके पीछे न चलिए। यदि ईश्वर की ऐसी ही मंशा होती तो वह हर प्राणी को आंख, नाक, कान, मुंह, मस्तिष्क आदि क्यों देता। उपस्थित ग्रामीणों ने नाटक की बहुत प्रशंसा की।
रेवांचल टाईम्स :- नाट्यगंगा छिंदवाड़ा के द्वारा स्वामी विवेकानंद जयंती युवा दिवस के अवसर पर स्वामी विवेकानंद के विचारों एवं सीखों को युवाओं तक पहुंचाने के लिए नुक्कड़ नाटकों के मंचन किए गए। समीपस्थ ग्राम सांख जटामा, उमरहार और चारगांव में नाट्यगंगा के कलाकारों दानिष अली, प्रहलाद उइके, स्वाति चौरसिया, प्रांशुल जुनगरे, विनोद ग्यास, अर्पणा पाटकर, श्रुति विश्वकर्मा, ऋषभ शर्मा , हेमंत नांदेकर एवं सचिन वर्मा ने रोचक नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन किया गया। इस नाटक का निर्देशन स्वाति चौरसिया ने किया। नाटक में कलाकारों ने स्वामी विवेकानंद के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला एवं उनकी द्वारा कही गई महत्तवपूर्ण बातों को उपस्थित दर्षकों को बताया। साथ ही युवाओं को युवा दिवस पर किस तरह अपने कैरियर पर ध्यान देना चाहिए और वर्तमान समय को देखते हुए युवाओं को किस तरह का आचरण करना चाहिए आदि कई बातों को समझाया गया। नाटक में बताया गया कि विवेकानंद जी ने कहा है कि कोई व्यक्ति कितना ही महान क्यों न हो, आंखे मूंदकर उसके पीछे न चलिए। यदि ईश्वर की ऐसी ही मंशा होती तो वह हर प्राणी को आंख, नाक, कान, मुंह, मस्तिष्क आदि क्यों देता। उपस्थित ग्रामीणों ने नाटक की बहुत प्रशंसा की।

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