रेवांचल टाइम्स - फार्मिग करने वाले किसानों एवं पशु पालकों को पशु पालन विभाग में पंजीयन करवाना आवश्यक है। जिससे इसे व्यवस्थित एवं विकसित किया जा सके एवं आवश्यकता होने पर जानकारी के आधार पर तकनीकी सहायता दी जा सके। इस कारण से किसी भी गतिविधि को नियंत्रित करना तथा लाभान्वित करना संभव हो सकेगा।
उप संचालक पशु चिकित्सा सेवा डॉ पी के अतुलकर ने बताया कि पोल्ट्री उद्योग को सुरक्षा प्रदान करने तथा विभिन्न गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिए वर्तमान में स्थापित तथा नवीन कुक्कुट प्रक्षेत्र/हेचरी का पंजीयन प्रारम्भ किया गया है। जिससे कुक्कुट प्रक्षेत्र/हेचरी की संख्या का सही आकलन हो सके। इससे भविष्य में लाभकारी नीतियों का निर्धारण एवं अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा। पंजीयन के लिए निर्धारित प्रारूप में आवेदन करना होगा । साथ ही निर्धारित पंजीयन शुल्क भी जमा कराना होगा। उन्होंने बताया कि 500 से अधिक व एक हजार तक किसी भी प्रकार के पक्षियों की क्षमता वाले फार्म को 100 रूपये, एक हजार से 5 हजार तक की क्षमता वाले फार्म को 200 रूपये, 5 हजार से 10 हजार तक की क्षमता वाले फार्म को 500 रूपये एवं 10 हजार से अधिक किसी भी प्रकार के पक्षियों की क्षमता वाले फार्म को एक हजार रूपये पंजीयन शुल्क देना होगा। प्रारम्भ में 05 वर्षों के लिए पंजीयन प्रमाण पत्र जारी किया जावेगा बाद में हर 03 वर्ष में नवीनीकरण कराना होगा। जिले के सभी पोल्ट्री उद्योग संचालकों से कहा गया है कि वे अपने फार्म का शीघ्र पंजीयन करायें।

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