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Friday, November 27, 2020

राष्ट्रीय मंच पर सचिन का रंग संवाद समानांतर इलाहाबाद और इप्टा उत्तरप्रदेश का आयोजन

 




रेवांचल टाइम्स  छिंदवाड़ा । कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण विगत आठ महीनों से पूरे देश में रंगकर्म की गतिविधियां रूक गई हैं। इस आपदा के समय को असवर में बदलते हुए देश के रंगसमूह ऑनलाइन कार्यशालाएं और संवाद आयोजित कर रहे हैं। इस क्रम में इलाहाबाद उत्तरप्रदेश की सुप्रसिद्ध संस्था समानांतर इंटीमेट थियेटर ग्रुप और इप्टा उत्तरप्रदेश के द्वारा ऑनलाइन रंग संवाद आयोजित किया जा रहा है जिसमें देश के ख्यातिलब्ध रंगकर्मियों को ‘मेरी रंगयात्रा और वर्तमान समय में रंगकर्म’ विषय पर संवाद करने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। यह छिंदवाड़ा के रंगकर्म के लिए बहुत गौरव का विषय है कि इस अखिल भारतीय स्तर के आयोजन में विगत दिनों नाट्यगंगा छिंदवाड़ा के अध्यक्ष एवं रंगकर्मी सचिन वर्मा को भी आमंत्रित किया गया। वे छिंदवाड़ा के पहले रंगकर्मी हैं जिन्हें मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय भोपाल का गुणवत्ता सुधार समिति का सदस्य नियुक्त किया गया है। आप छिंदवाड़ा के पहले निर्देशक हैं जिनके नाटकों के पचास से अधिक मंचन राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय ख्यातिलब्ध नाट्य समारोह में मंचन हुए हैं। देश की सुप्रसिद्ध संस्थाओं में आपको अतिथि शिक्षक के रूप में आमंत्रित किया जाता है। आप पेशे से चाटर्ड अकाउंटेंट हैं। सचिन वर्मा ने मेरी रंगयात्रा विषय के अंतर्गत अपनी दो दशकों की सतत रंगयात्रा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा अपने वक्तव्य में वर्ष 2000 में रंगकर्म की शुरूआत से लेकर इन दो दशकों में छिंदवाड़ा के रंगकर्म की प्रत्येक गतिविधियों पर प्रकाश डाला। नाट्यगंगा संस्था ने किस तरह छिंदवाड़ा में रंगकर्म को स्थापित किया, किस तरह दर्शकों एवं कलाकारों का जोड़ा, मंचन के लिए वित्त व्यवस्था कैसे की जाती है इन सभी बातों से सभी श्रोताओं को अवगत करवाया जिसे सुनकर महानगरों से जुड़े श्रोताओं को आश्चर्य हुआ कि छिंदवाड़ा में इतना अच्छा और व्यवस्थित रंगकर्म किया जा रहा है। युवा कलाकारों को संबोधित करते हुए सचिन ने कहा कि पूर्ण समर्पण के साथ ही रंगकर्म किया जाना चाहिए और एक बात का विषेश ध्यान रखना चाहिए कि हमारे किसी भी क्रियाकलाप से हमारी विधा बदनाम नहीं होना चाहिए। रंगकर्म के साथ ही अपनी पढ़ाई और रोजी रोटी की व्यवस्था करना अति आवश्यक है। वर्तमान समय में रंगमंच विषय पर बोलते हुए कहा कि यह आपदा का समय अपने साथ कई अवसर लेकर आया है इस समय में टैरिस थियेटर और आंगन रंगमंच जैसे नए प्रयोग किए जाने चाहिए। साथ ही आज के समय में युवाओं में सवाल नहीं पूछने की आदत हो गई है तो युवाओं को सवाल पूछना सीखना चाहिए। विदित हो कि सचिन वर्मा विगत दो दशकों से छिंदवाड़ा के रंगमंच को जीवित बनाए हुए हैं।


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