रेवांचल टाइम्स - प्रदेश की समस्त मंडियों के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। केंद्र शासन द्वारा किसानों की आड़ लेकर लाये गए कृषि अध्यादेशों (अब बिल) से कृषि मंडियों की आय निरंतर गिरती जा रही है जिस से मंडियों के कर्मचारियों के वेतन-भत्तों पर गहरा संकट मंडराया हुआ है। वेतन-भत्तों को शासकीय कोष से करवाने एवं राज्य शासन का कर्मचारी घोषित किये जाने की मांग के साथ समस्त कर्मचारी हड़ताल पर बैठ गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार कथनी और करनी में भिन्नता रखते हुए काम कर रही है जिसके कारण मंडियों में कोई किसान नहीं आ पा रहा है। मंडियों के अंदर होने वाले ट्रेड पर मंडी शुल्क का प्रावधान होने एवं मंडियों के बाहर ट्रेड पर शुल्क नहीं होने से व्यापारी भी मंडी शुल्क से बचने लिए बाहर खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं।
विदित हो कि कृषि उपज मंडी किसानों की कृषि उपज के भण्डारण और विक्रय के लिए निर्मित चुने हुए कृषकों की सरकार(मंडी समिति) द्वारा वित्त-पोषित स्वयात्तशासी समिति है, जो बिचौलियों के शोषण से किसान को बचाते हुए सही तौल और मोल दोनों का किसान हित में ख्याल रखती है परंतु अब किसानों का रक्षा कवच कही जाने वाली मंडियों का अस्तित्व सरकार की दोहरी नीतियों के कारण समाप्त होने की ओर अग्रसर है। समस्त मंडी कर्मचारी मंडियों का अस्तित्व बचाने एवं अपने वेतन-भत्तों की लड़ाई एक साथ लड़ रहे हैं।
अखिलेश बंदेवार कै साथ रेवांचल टाइम्स की एक रिपोर्ट

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