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Thursday, September 10, 2020

कहो तो कह दूँ - 'दलाल' तो इस देश की रीढ़ हैं गडकरी जी




रेवांचल टाइम्स - देखो नेता जी सब कुछ कर देना पर ऐसा जुलुम मत करना, वरना हम लोगों का क्या होगा, हमारा तो पूरा अमला और यंहा  काम करने वाले 'दलाल' बेरोजगार हो जाएंगेl आप को वैसे मालूम तो होगा कि हम लोग कितनी भारी भरकम  दक्षिणा देकर  यंहा पोस्टिंग करवा पाए हैl पूरी जीवन भर की कमाई लुटा दी  है तब कंही जाकर ये गद्दी मिली है और आप उसे वसूलने के पहले  ही अलसेट देने के चक्कर में हैl  ये दर्द से भरा, आंसू बहा देने वाला रुदन  देश भर के आरटीओ, उनके दफ्तर के कर्मचारियों चेक पोस्ट पर तैनात अमले और वंहा काम करने वाले 'दलालों' का हैl दरअसल केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री 'नितिन गडकरी'  ने ये घोषणा कर दी है कि वे बहुत जल्द ही देश भर के आरटीओ दफ्तर बंद करने वाले हैंl उनका कहना है की यंहा दलालों की तूती बोलती है और बिना पैसे के कोई काम नहीं होताl नितिन गडकरी जी को पता होना चाहिए क़ि हुजूर अकेला आरटीओ दफ्तर ही ऐसा नहीं है जंहा दलालों के बिना काम नहीं होता है जंहा बिना नोट  दिखाए फाइल आगे नहीं बढ़तीl आप किसी दिन किसी भी 'कलेक्ट्रर' चले जाओ  'नामांतरण करवाना हो', 'खसरे की नक़ल निकलवाना हो',  'गरीबी रेखा का कार्ड बनवाना हो', हर काम के लिए बाकायदा दलाल घूम रहे है आप उन्हें गाँधी जी दिखाओ और फिर देखो कैसे काम मिनिटों में होता हैl तहसील दफ्तर में  भी बिना दलालों के काम करवा कर के दिखा दो हम मान जाए आपकोl अपनी 'पेंशन फिक्स करवाना हो', रिटायरमेंट के बाद अपना 'जीपीएफ निकलवाना  हो' दांतो तले पसीना आ जाएगा आपको ट्रेजरी के चक्कर लगाते लगाते पर काम नहीं होगा पर जैसे ही आप किसी दलाल से मिलोगे वो आपके घर में आकर आपके सारे कागजात आपको सौंप देगा ये 'महिमा' होती हैं दलाल  की l मकान  बेचना हो, खरीदना हो, गाड़ी खरीदना हो, या बेचना हो तो दलाल की जरूरत है विदेशों से हथियार खरीदना हो तो उसमें भी दलालों का इन्वाल्वमेंट है, बैंक से कर्जा चाहिए तो दे दो 'ऍप्लिकेशन' इतने कागजात  मांग लेंगे कि आपकी 'सात पीढ़ी' उनकी लिस्ट देख कर काँप जाएगी  पर यदि दलाल से संपर्क साध लिया तो लोन घर बैठा पास हो कर आ जायेगा l कँहा नहीं है दलाली, अकेले आरटीओ को क्यों निशाना बना  रहे हो  गडकरी जी, अरे आरटीओ तो वो दूध देने वाली 'गाय' है जो सरकार की  सारी 'बेगार' अपने कन्धों पर लेकर  चलती  है l एक आरटीओ की पोस्टिंग पाने के लिये क्या क्या जतन  करने पड़ते हैं, कितनी दक्षिणा चढ़ानी  पड़ती है क्या आपको मालूम नहीं है ,चेक पोस्ट कैसे  नीलाम  होते है इससे भी आज अनजान नहीं होंगेl अभी देखा नहीं आपने मध्यप्रदेश के तत्कालीन परिवहन आयुक्त मधुकुमार का एक वीडिओ वायरल हुआ था जिसमें वे अपने अधीनस्तों से बाकायदा लिफाफा लेकर उसे  जाँघों के बीच छिपा कर बाकायदा उसका हिसाब अपनी डायरी में नोट करते जा रहे थे l वे भी बेचारे क्या करते  उन्हें  भी तो ऊपर  चढ़ावा देना होता हैl दलाली तो हर जगह मौजूद है मुंबई में तो सुना  है कि आपको यदि मकान भी किराये से चाहिए तो वो दलाल के मार्फ़त ही मिल सकेगा माकन मालिक 'डायरेक्ट' आपको मकान किराये पर नहीं दे सकता ये बात अलग है वंहा दलालों ने अपना नाम 'ब्रोकर' कर दलाल नाम की बदनामी से छुटकारा  पाने की कोशिश करी है पर  'आफ्टरऑल' हैं तो वे दलाल हीl  पूरे देश में जब दलाली फल फूल रही है तो बेचारे आरटीओ  दफ्तरों पर ही इतनी टेढ़ी नजर क्यों, और फिर आप ये भी तो सोचो जो काम आरटीओ में होता है उसके लिये आप कोई दूसरा डिपार्टमेंट  तो बनओगे  न, ये ही लोग वंहा पंहुच जाएंगे और वंहा  भी वो ही सब कुछ  होने  लगेगा जो अभी आरटीओ में होता है, आदमी और उनकी नीयत तो आप बदल नहीं सकते, दूसरी बात ये भी तो है कि जब आरटीओ बनने के लिए  लाखों  की दक्षिणा नेताओं को देना पड़ती है तो आरटीओ बनने के बाद वो गरीब पहले तो अपनी लगाई  पूँजी निकालना  चाहेगा न, कोई  घर  से तो  लाकर  देता नहीं है, यहीं कमाता है यही खर्च कर देता हैl एक तरफ तो प्रधान मंत्री मोदी जी लोगों को रोजगार देने की बात  कह रहे हैं दूसरी तरफ आप आरटीओ बंद  करके उन दलालों के पेट पर लात  मारने  की सोच रहे है जो  वंहा दलाली कर के  अपना और अपने बच्चो का पेट पाल रहे है किसी की रोजी रोटी छीनना  अच्छी  बात नहीं है गडकरी जी l अपना तो  मानना  ये है कि पहले आप अपनी बिरादरी को सुधार लो, जो नेता चुनाव के पहले सड़ियल सी मोटर सायकल पर चलता है वो विधायक और मंत्री बनने के बाद मात्र पांच साल में 'इनोवा' और 'फॉर्च्यूनर' पर कैसे चलने लगता है जरा इस पर भी नजरें इनायत कर लो , बेचारे गरीब आरटीओ उसके कर्मचरियों और दलालों पर चाबुक  बरसाने से कुछ नहीं होने वाला दलाल तो इस देश की 'रीढ़' हैं जिस दिन आरटीओ में आने के लिये लगने वाली 'बोली' आप ख़त्म करवा देंगे उस दिन के बाद से आप को आरटीओ दफ्तर  बंद करने की जरूरत नहीं पड़ेगा।
 कुछ समझे न नेता जी
                                    चैतन्य भट्ट

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