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Friday, August 7, 2020

कोविड-19 संक्रमित व्यक्तियों को मिलने वाली व्यवस्थाएं पर उठ रहे सवाल.....

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रेवांचल टाइम्स - देश में फैली कोरोना महामारी  संक्रमण को रोकने के लिए रोकथाम के लिए सरकार तमाम प्रयास कर रही है और कोरोना महामारी से बचाव के  साथ ही संक्रमित मरीजों के स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए करोड़ों अरबों रुपए खर्च कर रही है। लोगों को जागरूक करने लोगों को कोरोना महामारी से बचाव हेतु और संक्रमित व्यक्तियों के इलाज के लिए राज्य सरकारें भी प्रशासन के माध्यम से करोड़ों रुपए खर्च करके बीमार मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं परंतु कुरौना जैसी महामारी से संक्रमित व्यक्तियों को मिलने वाली व्यवस्थाएं सुविधाएं सरकार की हकीकत ओं को उजागर कर रहे हैं शासन भले ही करो ना जैसी महामारी को लेकर कागजी आंकड़ों में करोड़ों रुपए खर्च करने की बात कर रही हो लेकिन हकीकत कुछ और ही नजर आती है शासन प्रशासन के बीच की कड़ी में कोरोना महामारी संक्रमण से ग्रसित व्यक्तियों को मिलने वाली व्यवस्थाएं सुविधाएं शासन-प्रशासन की हकीकत को उजागर कर रहे हैं मामला मध्यप्रदेश के मंडला जिले का है जहां पर करोड़ों रुपए की बिल्डिंग पर संक्रमित व्यक्तियों  को क्वॉरेंटाइन रखकर वहां इलाज किया जा रहा है परंतु वहां की जो व्यवस्थाएं हैं उससे तो यह लग रहा है कि कोरोना जैसी महामारी से संक्रमित व्यक्ति वहां फैली गंदगी से ज्यादा संक्रमित हो सकता है और करोना पॉजिटिव  होने के बाद इलाज मिलने के बाद बचने के बजाय वहां फैली गंदगी से अन्य बीमारियों से कहीं ग्रसित ना हो जाए।  मडण्ला मुख्यालय मे करोना संक्रमित सेंटर पर जिले के 19 व्यक्तियों का ईलाज हो रहा है वहा की व्यवस्था को लेकर ऐसी संभावनाओं को मरीज ही व्यक्त कर रहे हैं।
यहां की व्यवस्थाओं को लेकर यहां इलाज के लिए मौजूद संक्रमित व्यक्तियों ने ही कुछ तस्वीर भेज कर हकीकत से पर्दा हटाया है।
 जहां  शौचालय की स्थिति को देखकर आप सही अंदाजा लगा लेंगे
19 एक्टिव संक्रमित व्यक्तियों का इलाज यहां पर जारी है और 19 व्यक्तियों के बीच में दो कमरों के शौचालय हैं और उन शौचालयों में दरवाजे नहीं है और एक दरवाजे पर कुंडी नहीं है बाकी शौचालयों में तो दरवाजे ही नहीं है जबकि 19 संक्रमित व्यक्तियों में महिलाएं भी हैं और पुरुष में है इन दोनों के बीच में कब कौन सा व्यक्ति शौचालय का उपयोग करेगा इसके लिए अब अवस्थाएं स्पष्ट नजर आ रही है वहीं संक्रमित व्यक्तियों को मिलने वाले भोजन का समय दोपहर 12:00 बजे और रात्रि में 10:00 बजे  है वही सुबह के नाश्ते में मुट्ठी भर चने पर चाय नहीं है वहीं शाम के समय केवल चाय और फिर रात में 10:00 बजे सीधे भोजन पाकर कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति अव्यवस्थाओं के चलते खासे परेशान हो रहे।
 जब एक तरफ शासन प्रशासन कोविड-19 कोरोना संक्रमण वायरस को लेकर चिंतित है और रोकथाम और संक्रमित व्यक्तियों की स्वास्थ व्यवस्थाओं के लिए  कहने वाले दावे अव्यवस्थाओं के आगे खोखले साबित हो रहे हैं।

 कोरोना महामारी से संक्रमित व्यक्तियों को मिलने वाले भोजन नाश्ता और वहां की व्यवस्थाएं शासन की तमाम व्यवस्था वाली बातों की हवा निकाल रही है अब इस पूरे मामले पर जिम्मेदार और प्रशासनिक अधिकारी अलग-अलग ढंग से अपनी बात रख रहे हैं जिससे स्पष्ट नजर आ रहा है कि शासन  की प्रशासन की कागजी निर्देश और घोषणाएं हकीकत में कुछ और ही बयां कर रही है अब देखना यह होगा कि इस पूरे मामले पर जिले के जिम्मेदार अधिकारी लापरवाह हो पर क्या कार्रवाई करते हैं।
                इनका कहना है
    जानकारी प्राप्त हुई है कोरोना संक्रमित मरीजो हो या जिन्हें कोरोटिन  में रखा गया है उनकी जो भी शिकायते है उन्हें हम बैठक कर समझेंगे और उनकी जो भी समस्या है उन्हें जल्द से जल्द निपटाया जायेगा
                          देवसिंग सैयाम
                     विधायक मंडला विधान सभा

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