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Sunday, June 21, 2020

भुआबिछिया: ठेकेदार की मनमानी अधिक दाम पर बेच रहे है देशी-विदेशी शराब


● जिले में बिना रेट लिस्ट के चल रही है अंग्रेजी शराब दुकान बेच रहे है मनमाफ़िक रेट में शराब

भुआबिछिया

रेवांचल टाइम्स - जिले में शराब ठेकेदारों की मनमानी आये दिन सामने आती है चाहें शराब की बिक्री को लेकर हो, या जगह जगह शराब बिकवाने का हो।आपको बता दे कि शराब दुकान भुआबिछिया में जानबूझकर शराब के कीमतों की ।सूची नही लगाई गई है ताकि मनमाने तरीके से अधिक दामों में बेचा जा सके। और ये सब जिला आबकारी विभाग के सह पर ठेकेदार मनमानी कर रहा है। मण्डला जिले के साथ-साथ विकास विकास खंड बिछिया में देशी विदेशी शराब भले ही प्रदेश सरकार के अधीनस्थ ठेके पर है लेकिन बिछिया में शराब माफियाओं के द्वारा शराब दुकान को चलाया जा रहा है। नियम के मुताबिक जब किसी व्यक्ति को लायसेंस जारी की किया जाता है। तो वो लायसेंस सिर्फ और सिर्फ काउंटर से शराब बेचने के लिए होता है लेकिन बिछिया शराब दुकान के लिए सरकार के नियम कानून कुछ भी मायने नही हैं लगातार सरकार के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। साथ ही नियमों कानून को दरकिनार करते हुए दिन भर तहसील मुख्यालय से गाँव-गाँव तक शराब की सप्लाई 800 कार, बोलोरो, में भर कर जगह जगह की जाती है सप्लाई । और सप्लाई करने के अन्य माध्यम भी हैं जो लगातार रात दिन काम करती हैं रही बात बिछिया की तो सूत्रों के मुताबिक नगर में ही कम से कम 25 से 30 छोटे बड़े अवैध शराब दुकान संचालित हैं बस स्टेंड में लगभग पान ठेला, होटल 15 से 20 अवैध शराब दुकान, हीरा पेट्रोल पंप के आस-पास ढाबा, होटल में 5 से 6 अवैध शराब दुकान, वही गणेश पेट्रोल पंप  के आस पास होटल दुकान में लगभग 5 से 6 दुकानों में अवैध शराब बिक्री की जा रही है, जो की लगातार संचालित है कुछ ऐसे भी लोग हैं जो जिनका सामने दुकान कुछ और दिखाई दे रहा है और अपना मुख्य व्यापार को छोकर शराब बेच रहे, पान बेचने वाला व्यक्ति अब शराब बेच रहा है किराना बेचने वाला व्यक्ति अब शराब बेच रहा है यहाँ तक वे व्यक्ति जिसका शराब से दूर दूर तक कोई संबंध नही था आज वो इस अबैध शराब बेच कर फल फूल रहै है। ये सब जिम्मेदार प्रशासन की ढीली पकड़, मिलीभगत, रिश्वत खोरी,मंथली लिफाफा के चलते हो रहा हैं। आबकारी विभाग औऱ प्रशासन को सब जानकारी हैं की शराब माफिया कैसे काम करते हैं पर सब जानकारी होने के बाद भी उन पर कोई करवाई नही की जाती है। बल्कि उन्हें संरक्षण दीया जा रहा है अगर बात कारवाई की जाए तो केवल ये कभी कभार कच्ची शराब को पकड़ कर खाना पूर्ति करते रहते है, औऱ अगर कभी शराब पकड़ा भी गई तो किसी गरीब की पकड़ कर उसकी कमर तोड़ दी जाती है।
        वही ठेकेदार ने दुकानों में अपने मनमाने दामों पर देशी-विदेशी शराब बेचकर लोगो को लूटने में जुटा हुआ है। मनमाने दामों की वजह से शराब के शौकीनों की जेब ढीली हो रही है कोरोना काल में दो माह तक शराब दुकानें बंद रहने के बाद प्रदेश सरकार ने जब दुकानें खोलने की अनुमति ठेकेदारों को प्रदान की तो ठेकेदार कुछ माह पूर्व ही करोड़ों में लिए गए ठेके और दो माह के बीच हुए नुकसान को लेकर प्रदेश सरकार से अपनी मांगों को पूरा करने के लिए सामने आ गए। शराब ठेकेदारों की मांगों को देख प्रदेश सरकार ने उनकी बात मानने से इंकार किया तो प्रदेशभर के कई शराब ठेकेदारों ने अपने लायसेंस सरेंडर कर दिए। शराब से प्रदेश सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व प्राप्त होता है। जिसके चलते राज्य सरकार द्वारा शराब दुकानो को संचालित करने के निर्देश जारी किए गए। ठेकेदारो ने देशी और विदेशी शराब दुकानों की शुरुआत कर दी। लेकिन दुकानें खुलने के बाद शराब दुकान पर लोगों की भीड़ देखकर ठेकेदारो ने अपनी मनमानी की शुरुआत कर दी है। वो मनमानी अभी तक जमकर चल रहा हैं। शराब अधिक कीमत में बेची जा रही है। जबकि प्रदेश सरकार के निर्देश हैं कि शराब की बिक्री एमएसपी (MRP) पर ही या एमआरपी रेट के अंदर ही बिक्री की जाए। पर सरकार के आदेशों को मनाने वाला कौन है और आबकारी अधिकारी व ठेकेदारो ने सारे नियम को ताक में रखकर सरकार को ठेंगा दिखा रहे हैं सूत्रों की मुताबिक देशी शराब के क्वार्टर पर 10 से 20 रुपए अधिक लिए जा रहे हैं। अंग्रेजी शराब की बोतल पर तय कीमत से 200 से 250 रुपए अधिक वसूलने का काम सीधे तौर पर ठेकेदार व शराब माफियाओ के द्वारा किया जा रहा है। ठेकेदार खुद के द्वारा नियम कायदे बनाकर मनमाने दामो पर शराब बेचकर लोगो को लूट रहे है वही शराब शौकीनों ने बताया कि बियर की बोतल पर भी 50 से 60 रुपए अधिक लिए जा रहे हैं। ठेकेदारो द्वारा शराब के दाम बढ़ाकर दिया जा रहा वही अवैध  वसूली को लेकर शराब के शौकीनों द्वारा अब विरोध दर्ज कराया जाने लगा है। बताया जा रहा है शराब दुकान पर रेट लिस्ट नही है इस पुरे गोलमाल को करने के लिए ठेकेदार औऱ आबकारी विभाग सुनियोजित प्लानिंग कर शराब को बेच रहे है, दुकानों पर जान बूझकर रेट लिस्ट नही लगाई गई है और न ही एमएसपी रेट पर शराब देने के बोर्ड लगाया है। वही जब रेवांचल संवाददाता ने जिला आबकारी अधिकारी से इस संबद्ध में बात की तो बेचारे अधिकारी बहुत ही अंजान बनने की कोशिश की और कहा कि हमे कुछ पता नही पर आप कह रहे है तो ठेकेदार को हम बोल देते हैं की रेट लिस्ट लगा ले भाई ताकि लोगो को पता चल सके कि किस शराब का क्या रेत है औऱ कौन सी शराब की एमआरपी रेट कितना है। वही आबकारी विभाग के एक सरकारी कर्मचारी ने बताया कि रेट लिस्ट न लगाने की बहुत बड़ा खेल हैं इसके पीछे सिर्फ शराब माफिया हो काम करते हैं जिससे सीधे तौर पर ठेकेदार को मुनाफा हैं। लेकिन ये माफिया खोरी शराब शौकीनों के जेब ढीली कर रहा है और ये पूरा घालमेल अकेले बिछिया में नही बल्कि पुरे मण्डला जिले में भर की दुकानों में चल रहा है जिससे न सिर्फ सरकार बल्कि आम जनता के साथ भी छलावा हो रहा है और ठेकेदार करोड़ो के वारे न्यारे कर रहा है। इसका कारण यही की ठेकेदार द्वारा शराब दुकानों पर एमआरपी से भी अधिक रुपये लिए जा रहे है प्राप्त जानकारी अनुसार यहां पर एक बॉटल पर 200 से 250 रुपए अधिक मूल्य वसूला जा रहा है। जबकि नियम के मुताबिक एमआरपी से अधिक रेट में शराब नहीं बेची जा सकती है।

इनका कहना हैं
इस विषय को अपने मेरे संज्ञान में लाया हैं अगर शराब दुकान में रेट लिस्ट नही हैं तो हम बोल देते हैं कि रेट लिस्ट लगाए और दुकान संचालित करें।

इंद्रेश तिवारी
डी. ओ. आबकारी विभाग मण्डला

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