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Thursday, May 28, 2020

जल विद्युत एवं बहुदेशीय परियोजना में उजङेंगे सैकड़ों गांव डिंडोरी और मंडला में बनेंगे तीन जल विद्युत परियोजनाएं

जल विद्युत एवं बहुदेशीय परियोजना में उजङेंगे सैकड़ों गांव डिंडोरी और मंडला में बनेंगे तीन जल विद्युत परियोजनाएं
प्रतीकात्मक फोटो 


          26 मई 2020 को भारत सरकार से प्राप्त जानकारी के अनुसार बतलाया  गया है कि पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन, दिल्ली और नर्मदा बेसिन प्रोजेक्टस कम्पनी लिमिटेड, मध्यप्रदेश के बीच 22 हजार करोड़ का अनुबंध हुआ है।इसमें नर्मदा घाटी के 225 मेगावाट जल विद्युत और बहुदेशीय 12  परियोजनाएं शामिल है।ज्ञात हो कि नर्मदा घाटी में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 29 बडे बांध प्रस्तावित है।जिसमें बरगी, तवा, बारना, इंदिरा सागर(पुनासा),ओंकारेश्वर,महेश्वर,मटियारी, हालोन आदि बांध का निर्माण हो चुका है।हालोन बांध से  मंडला एवं बालाघाट के अधिकतर विस्थापित  परिवार आज भी पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं। बरगी बांध के उपर अपर नर्मदा, अपर बुढनेर, राघवपुर, रोसरा और बसानिया(सिंगापुर) बांध बनना बांकी है।भारत सरकार और मध्यप्रदेश के बीच हुए अनुबंध के अन्तर्गत डिंडोरी और मंडला जिले के राघवपुर, रोसरा एवं बसनिया बांध से 65 मेगावाट जल विद्युत परियोजना बनाया जाना प्रस्तावित है जिसमें बसनिया बांध का उल्लेख किया गया है।इन तीनों विधुत परियोजनाओ हेतु 8367 हैक्टर क्षेत्र में बसे किसानों को विस्थापित किया जाएगा।2011 की जानकारी अनुसार इन तीन परियोजनाओं पर कुल 1283.12 करोड़ रूपये की लागत अनुमानित था।अब इसकी लागत दोगुना से ज्यादा आंका जा रहा है।

      03 मार्च 2016 के विधानसभा सत्र में विधायक जितेंद्र गहलोत द्वारा नर्मदा नदी पर 29 बङे बांध की योजना सबंधि पुछे गए सवाल के जवाब में प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखित जबाब दिया था कि राघवपुर, रोसरा, बसनिया, अपर बुढनेर आदि परियोजना नए भू अर्जन अधिनियम से लागत में वृद्धि होने, अधिक डूब क्षेत्र होने, डूब क्षेत्र में वनभूमि आने से असाध्य होने के कारण निरस्त की गई है।विदित हो कि महिना भर पहले राज्य सरकार ने नर्मदा घाटी में 26 साल पुरानी महेश्वर बिजली परियोजना के समझौते को रद्द कर दिया था।इसमें 18 रूपये प्रति यूनिट बिजली मिलनी थी।आज देश में सरप्लस बिजली उपलब्ध है।प्रदेश के पास 10,627 करोड़ यूनिट बिजली उपलब्ध है और प्रदेश की कुल खपत मात्र 7,551 करोड़ यूनिट है अर्थात प्रदेश के सम्पुर्ण खपत के बाद भी 3076 करोड़ यूनिट बिजली सरप्लस के रूप में उपलब्ध है।तो सवाल उठता है कि इस तरह की जल विद्युत परियोजना हेतु लोगों को विस्थापित करना और सघन जंगल, जैव विविधता नष्ट करना आवश्यक है?

       बरगी बांध से 162 गावों के विस्थापितो को 30 साल बाद भी व्यवस्थित न कर पाने वाली सरकार एक बार फिर विकास के नाम पर सैकड़ों आदिवासी,दलित, किसान, वंचितों को उजाङने की योजना बना रही है।बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ राज्य सरकार से मांग करता है कि इस तरह की परियोजना को रद्द कर नर्मदा एवं उसकी सहायक नदियों को संरक्षित करने की दिशा में कार्य करे।

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