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Sunday, May 24, 2020

नागपुर-सिवनी नेशनल हाइवे पर अगले दो तीन महीनों के लिए भारी वाहनों की आवाजाही पर लग सकती है रोक

सिवनी। नागपुर-सिवनी नेशनल हाइवे पर अगले दो तीन महीनों के लिए भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लग सकती है। कुरई घाटी में चार किमी फोरलेन सड़क निर्माण करने के लिए हाइवे को बंद करने पर मंथन चल रहा है। सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। प्रशासन कभी भी इस संबंध में अंतिम फैसला ले सकता है। प्रोजेक्ट को पूरा करने में आ रही बाधा पर प्रधानमंत्री कार्यालय सहित सड़क एवं परिवहन मंत्रालय सीधे तौर पर निगरानी कर रहा है।


पत्थर व मलबा गिरने की आशंका - कुरई घाटी में वाहनों की आवाजाही बहाल रखते हुए निर्माण कार्य जारी रखना काफी खतरनाक हो सकता है। क्योंकि घाटी के चार किमी हिस्से में डायवर्सन की कोई गुंजाइश नहीं बची है। घाटी हिस्से में निर्माण के दौरान बड़े बड़े पत्थरों और मलबे के सड़क पर गिरने की संभावना बनी हुई है। इसे देखते हुए एनएचएआई पिछले एक साल से हाइवे पर यातायात बंद करने की मांग कर रहा है। लेकिन मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र बार्डर का हिस्सा होने के कारण यहां से निकलने वाले वाहनों पर अभी तक रोक नहीं लगाई जा सकी है।टोल कंपनियों को होगा नुकसान - हाइवे के बंद होने से टोल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। नागपुर से खवासा के बीच दो टोल नाके काम कर रहे हैं। वहीं मेटेवानी अंतर्राज्यीय जांच चौकी से हर दिन हजारों वाहनों की आवाजाही होती है। इससे मध्यप्रदेश सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता है। लेकिन अब हाइवे को बंद करने के अलावा प्रशासन के पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है।

60 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा - मोहगांव से खवासा के बीच 28 किमी फोरलेन सड़क बनाने का काम दिलीप बिल्डकॉन कंस्ट्रक्शंस कंपनी द्वारा किया जा रहा है। करीब 750 करोड़ रुपये की लागत से देश का पहला इको फ्रेंडली नेशनल हाइवे एनएचएआई बनवा रही है। इसमें कई किमी के एनीमल अंडर पास बनाए जा रहे हैं। साथ ही पूरे वनक्षेत्र के फोरलेन को लाइट व साउंड प्रूफ बनाया जा रहा है ताकि पेंच नेशनल पार्क के बीच से गुजरने वाले इस हाइवे में वन्य जीवों की आवाजाही प्रभावित न हो। पेंच कान्हा कारीडोर के चिन्हित स्थानों पर 5 मीटर ऊंचाई के कई अंडर पास बनाए जा रहे हैं। 14 स्थानों पर अंडर पास बनाने के साथ ही एनीमल क्रासिंग कलवर्ट व अन्य स्ट्रेक्चर तैयार किए जा रहे हैं। फोरलेन बना रही सड़क कंपनी 60 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा कर चुकी है।कुरई घाटी में निर्माण बेहद चुनौतीपूर्ण - एनएचएआई के तकनीकी अधिकारियों की मानें तो कुरई घाटी में फोरलेन का निर्माण कंपनी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। 4 किमी के इस छोटे से हिस्से का निर्माण करने में काफी मशक्कत करनी प़उ रही है। ऊंची ऊंची पहा़िउयों को काटने के साथ ही इसमें कई एनीमल क्रासिंग के लिए स्ट्रेक्चर बनाए जाने हैं। भारी वाहनों की आवाजाही बहाल रखते हुए इसका निर्माण करना कंपनी के लिए कठिन हो रहा है।आए दिन लग जाता है जाम - लॉकडाउन में भी फोरलेन निर्माण का कार्य जारी है। पिछले डेढ़ माह के दौरान फोरलेन का काम बंद रहने के कारण करीब 10 प्रतिशत की प्रोग्रेस पर असर पड़ा है। फिलहाल घाटी की पहाड़ियों को काटने और स्ट्रेक्चर निर्माण के लिए जगह बनाने का काम किया जा रहा है। इसके लिए वाहनों को रोककर पहाड़ियों की कटाई करनी पड़ रही है। इस कारण आए दिन घाटी में जाम की स्थिति निर्मित हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि हाइवे को बंद नहीं किया गया तो इसे कुछ घंटों तक बंद करने के बाद ही निर्माण कार्य किया जा सकेगा। ऐसे में हर दिन जाम की स्थिति बनेगी।कटंगी व छिंदवाड़ा डायवर्ट करेंगे वाहन - हाइवे से हर दिन एक हजार से ज्यादा भारी वाहनों की आवाजाही है। खवासा से कुरई के बीच हाइवे का निर्माण कार्य अंतिम दौर में है। वहीं मोहगांव से घाटी तक निर्माण कार्य भी तीव्र गति से चल रहा है। ऐसे में घाटी का रुका निर्माण कार्य पूरा करने वाहनों को रिडडीटेक होते हुए कटंगी और मनसर से छिंदवाड़ा की ओर डायवर्ट करने पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा हुआ तो सिवनी से नागपुर जाने वाले लोगों को काफी लंबा सफर तय करना पड़ सकता है।घाटी में वैकल्पिक मार्ग के लिए कोई जगह नहीं है। एनएचएआई हाइवे को बंद करने की मांग कर रहा है। वाहनों को डायवर्ट करने हाइवे का सर्वे कराया गया है। पीएमओ से भी प्रोजेक्ट की निगरानी की जा रही है। जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा ताकि घाटी के हिस्से का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा हो सके।

डॉ राहुल हरिदास फटिंग कलेक्टर सिवनी

चार किमी की घाटी में फोरलेन बनाने के लिए हाइवे में भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाना जरुरी है। वाहनों की आवाजाही के साथ घाटी में निर्माण कार्य जारी रखना संभव नहीं है। यह बेहद खतरनाक हो सकता है। क्योंकि डायवर्सन मार्ग के लिए घाटी में कोई जगह नहीं बची है। प्रशासन इस पर निर्णय लेगा।

बीपी गुप्ता, प्रोजेक्ट डायरेक्टर

एनएचएआई छिंदवाड़ा

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