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Tuesday, May 5, 2020

डिण्डोरी: 3 दिन में भूखे प्यासे मजदूर पहुंचे गृह जिले में, पहुचते ही दर्द छलका

3 दिन में भूखे प्यासे मजदूर पहुंचे गृह जिले में, सूरत की कपड़ा फैक्ट्री में काम करते थे


 सरकार के द्वारा प्रवासी मजदूरों को उनके मुकाम तक पहुंचाने के दावों की खुली पोल
फ़ोटो।01 मालवाहक ट्रक से उतरते मजदूर


,02। मजदूरों के साथ महिलाएं भी
,03 दो गर्भवती महिलाएं






डिण्डोरी।सरकार द्वारा लाक डाउन में फंसे मजदूरों को अपने गृह जिले में सुरक्षित पहुंचाने के लाख दावे करे लेकिन गुजरात से डिण्डोरी और अनूपपुर जिले के 63 मजदूरों को देखकर यह दावे खोखले साबित हो रहे हैं जहां सूरत गुजरात से 3 दिन भूखे प्यासे यह मजदूर एक छोटे से मालवाहक ट्रक में भेड़ बकरियों की तरह भरकर बुधवार को डिण्डोरी पहुंचे ,जहां पर मजदूरों के पहुंचने की जानकारी लगते ही पीपुल्स समाचार की संवाददाता वहां पर पहुंची और उन मजदूरों से चर्चा की तब उन मजदूरों का दर्द छलका और उन्हें अपनी व्यथा सुनाई कि किस मुसीबत में और परेशानी में वह लोग वहां फंसे रहे जब खाने-पीने का इंतजाम नहीं बचा भूखे मरने की नौबत आ गई वही मकान मालिक के द्वारा भी प्रताड़ित करने पर अपने जिले में आने का मन बना लिया, वही मजदूरों ने अपने घर से पैसा बुलवाकर चंदा इकट्ठा किया और एक व्यक्ति 2700 सो किराए के हिसाब से 63 कुल मिलाकर ₹168400 में एक मिनी ट्रक का बंदोबस्त हुआ, जहां रास्ते में भी कई समस्याएं  आई लोगों ने गांव में इन मजदूरों को उतरने नहीं दिया पानी तक पीने की व्यवस्था नहीं थी, इस मुश्किल भरी परिस्थितियों में भूखे प्यासे 3 दिन के बाद यह मजदूर जैसे-तैसे डिण्डोरी पहुंचे जहां पर आकर उन्हें मीडिया के सामने कहा  हमें अपने जिले में पहुँचकर,आप लोगों के सहयोग देखकर बहुत अच्छा लग रहा है।

ऐसे छलका मजदूरों का दर्द सुनाई आपबीती

गुजरात राज्य के सूरत से  कपड़ा मिल में काम करने गए ,जिले के मजदूर मंगलवार को  लौटे, अपने गृह जिले में 63 मजदूरों ने 3 दिन का सफर तय खड़े खड़े कर एक ही ट्रक में जिसमें पुरुष ,महिलाए,गर्भवती महिला सहित बच्चे भी  भेड़ बकरियों की तरह ठूंस ठूंस  डिण्डोरी पहुंचे जहां उन्हें भोंदु तोला  स्थित सीनियर बालक छात्रावास  क्वॉरेंटाइन सेंटर में स्वास्थ्य परीक्षण के बाद अलग-अलग जगहों पर   शिफ्ट  कर दिया गया ,लेकिन इन सबके बीच रास्ते के सफर में अपनी कहानी बयान करते हुए मजदूरों का दर्द छलक गया , मजदूरों ने बताया कि,  22
मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद 14 अप्रैल तक जैसे तैसे जितने पैसे थे, उसमें गुजारा कर लिया लेकिन 14 तारीख के बाद फिर से लॉक डाउन की घोषणा के बाद हमारे पास खाने के लिए भी प्रबंध नहीं था ,वहीं गुजरात सरकार के द्वारा भी हमारी कोई मदद नहीं की गई ,राशन के लिए भी बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा वहीं मकान मालिक ने भी बोल दिया कि 3 तारीख के पहले खाली करके चले जाओ वरना लाइट, पानी, बिजली सब बंद कर दिया वही एक दूसरे के यहां पर घर पर ताला लगाकर दिन निकाले ,जब बहुत अधिक स्थिति खराब हो गई तो हमने गृह जिले में आने की सोची। मजदूरों ने बताया कि कथनी और करनी में फर्क होता है हमें कहीं भी शासन की तरफ से किसी भी तरह की मदद नहीं मिल पाई अगर हम यह फैसला नहीं लिए होते तो हम वहां पर भूखे मर जाते।

नगर पंचायत अध्यक्ष पंकज सिंह के तेकाम ने दिया आश्वाशन

वही मजदूरों के जैसे ही पहुंचने की खबर नगर पंचायत अध्यक्ष को मिली वह  क्वारेन्टीन सेंटर में पहुचे, वहां उपस्थित मजदूरों से वास्तविक स्थिति के बारे में जानकारी मिलने पर उन्होंने इस विषय को दुर्भाग्यपूर्ण बताया वही उन्होंने राज्य सरकार से अवगत करा कर इस विषय में मजदूरों की हर संभव मदद करने का आश्वासन भी दिया वही जो स्वयं के पैसे से यहां तक पहुंचे हैं उन मजदूरों को उनके पैसे वापस दिलवाने के लिए कलेक्टर के माध्यम से राज्य सरकार को अवगत कराने का आश्वासन भी दिया वही लगातार लगदा उन के बाद से नगर में असहाय गरीब मजदूरों को नगर पंचायत अध्यक्ष द्वारा भोजन की व्यवस्था कराई जा रही है वहीं इन 63 मजदूरों की भी खाने की व्यवस्था नगर पंचायत अध्यक्ष के द्वारा करवाई गई वही जिले के अन्य मजदूर जो अभी भी दूसरे राज्यों में या जिले में फंसे हुए हैं उन्हें बिना परेशानी के जिले में लाने का भी आश्वासन नगर पंचायत अध्यक्ष पंकज सिंह तेकाम के द्वारा दिया गया।

पूर्व केबिनेट मंत्री ओमकार सिंह मरकाम भी पहुचे,हाल जानने

पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमकार मरकाम भी क्वॉरेंटाइन सेंटर में मजदूरों के हालचाल जाने के लिए पहुंचे जहां पर उन्होंने बताया कि हम प्रधानमंत्री से निवेदन करते हैं कि गरीबों के लिए कही बातो  से आशा जगती है ,लेकिन इसके बाद ऐसी स्थिति मजदूरों की होती है तो लोगों का विश्वास टूटता है, और हम चाहते हैं कि  प्रधानमंत्री की बात पर जिलेवासियों का विश्वास बना रहे ,इसलिए निर्णय में जो भी बात हो वह वास्तविकता वाले हो यहां आकर  में राजनीति की बात नहीं करता, मानवीय मूल्य पर सच्चाई की बात करता हूं कि गरीब, मजदूर जो परेशान है उनकी अच्छी व्यवस्था की जाए जहां वह है वहां पर व्यवस्था की जाए, अगर बुलाया जा रहा है तो उनकी मदद की जाए।

कब तक सुरक्षित जिला

जहां प्रवासी मजदूरों का लगातार जिले में प्रवेश करना जारी है, वही इन परिस्थितियों के मद्देनजर कलेक्टर बी कार्तिकेन ने भी 4 मई से लेकर 17 तारीख तक लॉक डाउन बढ़ाना ही उचित समझा ,क्योंकि लगातार प्रवासी मजदूरों का जिले में प्रवेश करना चालू है जिससे संक्रमण फैलने का खतरा तो है ही इसके साथ ही हाई रिस्क जोन से डिंडोरी जिला जो कि अभी ऑरेंज जोन में है ,इस तरह हाई रिस्क जोन से यहां पहुंचे मजदूरों का जिले में प्रवेश करना भी कहीं ना कहीं प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है वहीं इनकी स्वास्थ्य को लेकर साथ ही सतत निगरानी के   द्वारा  ऐसे मरीजों को चिन्हित करके क्वॉरेंटाइन किया जाना बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सारे हाई रिस्क जोन से डिंडोरी जिले में प्रवेश कर चुके हैं।

इनके अनुसार


        यहां सूरत से 63 मजदूर आए हैं ,जिनमें से कुछ डिण्डोरी के हैं कुछ अनूपपुर जिले के हैं स्वास्थ्य कर्मियों को परीक्षण कर उनके लक्षण के आधार पर अलग-अलग जगह पर इन मजदूरों को क्वारेन्टीन सेंटर में रखा जाएगा, वही इनमें से सर्दी खासी के पेशेंट के सैंपल के लिए कहा गया।वही  परीक्षण के बाद अनूपपुर जिले के मजदूरों को वहां पहुंचाने का इंतजाम किया जा रहा।

डॉ आर के मेहरा
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डिण्डोरी

रेवांचल टाइम्स से अविनाश टांडिया की रिपोर्ट

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