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Monday, May 18, 2020

मंडला: शराब ठेकेदारों की नोक पर आबकारी विभाग, साठगांठ से बिक रही गांव गांव शराब

फाइल फोटो 


जिले में धृतराष्ट्र की तरह अंधा आबकारी विभाग शराब ठेकेदारों की नोक पर आबकारी विभाग

आबकारी की साठगांठ से बिक रही गांव गांव शराब

आबकारी अधिकारियों को जानकारी होने पर भी नही हो रही कोई कार्यवाही

जिले में धृतराष्ट्र की तरह अंधा आबकारी विभाग शराब ठेकेदारों की नोक पर आबकारी विभाग

आबकारी की साठगांठ से बिक रही गांव गांव शराब

आबकारी अधिकारियों को जानकारी होने पर भी नही हो रही कोई कार्यवाही

मण्डला/ नैनपुर - जिले का आबकारी विभाग अब मानो पूरी तरह धृतराष्ट्र की तरह अंधा हो चुका है सब कुछ पता होने के बावजूद भी उनके द्वारा कार्यवाही के लिए कोई भी जित्तोजहत नहीं की जा रही है विभाग को सब कुछ पता होने के बाद भी आबकारी विभाग ना तो नैनपुर आता है ना तो ग्रामीण इलाकों पर अबैध तरीके बिक रही देशी,बिदेशी शराब पर कोई भी कार्यवाही करते नजर आता है केवल इनके द्वारा ऑफिस में ही बैठकर कागजों पर ही कारवाही की जाती है औऱ कागजो की खानापूर्ति करते रहते है जहाँ एक ओर आबकारी नियमो के अनुसार ठेकेदारों को ठेके से ही देशी विदेशी शराब बिक्री करने का आदेश है लेकिन पूरे जिले में चाहे नगर हो या ग्रामीण क्षेत्र के गाँव-गाँव और गली-गली में बिक रही हैं, वही अब अवैध देशी, विदेशी एवं कच्ची शराब को लेकर समाज में कानून व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह्न लग रहे है। गाँव-गाँव व गली-गली में खुलेआम हो रही अवैध शराब की बिक्री से जहाँ गाँवों का माहौल खराब हो रहा है, वहीं युवा पीढ़ी भी नशे की लत की आदी होते जा रहै है। जिससे दर्जनों ऐसे परिवार है, जो उजड़ने की कगार पर हैं। ऐसा भी नहीं है कि अवैध देशी विदेशी शराब के कारोबार की जानकारी जिले के आबकारी विभाग को न हो, किन्तु जानकारी के बाबजूद भी अवैध शराब की बिक्री पर लगाम न लगने से आबकारी, पुलिस विभाग की कार्य प्रणाली सवालों के घेरे में खड़ी होती दिखाई दे रही है।

अनेको ग्रामीण इलाकों में घर से बेची जा रही शराब

नैनपुर तहसील क्षेत्र के दर्जनों ऐसे गाँव और मजरे है, जहाँ अवैध शराब का काला कारोबार बे-रोकटोक जारी है। क्षेत्र के कई गाँवों की स्थिति यह है कि गाँव वालों को पानी तलाश में भले ही मीलों भटकना पड़ता हो, पर मदिरा प्रेमियों में गाँव में बिना मशक्कत किये ही शराब उपलब्ध हो जा रही है। अवैध रूप से गाँव-गाँव में संचालित हो रही अवैध शराब की दुकानों ने गाँवों का माहौल दूषित कर दिया है। वही सूत्रों की माने तो इस अबैध कारोबार में शराब के कारण दिनों-दिन अपराधों में वृद्धि हो रही है। औऱ साथ ही आसानी से शराब मनचाहे जगहों में उपलब्ध हो जाने से भोले-भाले ग्रामीण व युवा वर्ग शराब की लत में जकड़ता जा रहा है। सूत्रों की मानें तो ऐसे बहुत कम गाँव होंगे, जहाँ अवैध रूप से शराब की बिक्री नहीं हो रही हो। ऐसा भी नहीं कि आबकारी महकमा इस अवैध कारोबार से अंजान हो, बल्कि जानकारी होते हुए भी विभाग अवैध शराब के कारोबार को अनदेखा कर रहा है। गाँव-गाँव तक शराब पहुँचाने के लिये ठेकेदार द्वारा स्थानीय जिम्मेदारों से साँठ-गाँठ कर जीपों व बाईक से परिवहन किया जा रहा है। उसके बाबजूद भी प्रशासन अवैध शराब का व्यापार करने वालों से दूर है। इसी वजह से शराब कारोबारियों के हौंसले बुलंद है और धड़ल्ले से अवैध शराब का कारोबार संचालित हो रहा है। अवैध शराब की बिक्री को रोकने के मामले में सरकारी सिस्टम फेल साबित हो रहा है। अगर हम बात करे नैनपुर, पिंडरई, पाठासीहोरा, डिठौरी, हीरापुर, मक्के,धनोरा, रेवाड़ा,अतरिया एवं अन्य ग्रामो पर तो यहाँ शराब कारोबारी नियम और कानून को ताँक पर रखकर व्यापार को संचालित कर रहे है। ऐसा ही हाल पिंडरई क्षेत्र के कई गाँवों में किरानों की दुकानों पर भी अवैध शराब आसानी से उपलब्ध हो जायेगी। यही नहीं नैनपुर क्षेत्र के ग्राम धनोरा , अतरिया ,इमलीटोला, लालबर्रा के अनेको घर पर खुले आम अवैध कच्ची शराब बनाने के लिये भट्टियाँ धधक रहीं हैं और क्षेत्र के कई स्थानों पर आदिवासी जाति के साथ साथ अन्य लोग भी खुलेआम शराब बेच रहे है, किन्तु उसके बाबजूद भी आबकारी विभाग के द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे है। जिससे आये दिन विवाद की स्थिति भी खड़ी हो रही है। क्षेत्रीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गाँव में बिक रही अवैध शराब पर पाबंदी लगाने को अनेक बार माँग उठाई है पर नतीजा सिफर रहा।। नगर में पैसों ओर दारू की खातिर बिके कुछ कथाकथित पत्रकार

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नैनपुर नगर के कुछ कथाकथित पत्रकारों के द्वारा ठेकेदार को अपने दम पर शराब बेचने का हौसला दिया जाता है ठेकेदार ओर शराब दुकान के मैनेजर द्वारा कहा जाता है कि हम शासन प्रशासन को संभाल लेंगे तुम चिंता न करो शासन प्रशासन हमारी नकेल पर है केवल तुम हमारा ध्यान दो हमारे द्वारा कोई भी खबर चैनल या अखबारों में प्रकाशित नहीं की जाएगी खबर न छापने के एवज में इन पत्रकारों के द्वारा ठेकेदार से कुछ पैसे ओर दारू की मंथली बंधी कर ली गई है ओर हर माह एक निश्चित तारीख आते ही इनके द्वारा ठेकेदार से पैसे एवं दारू चुपचाप ले लिए जाते है साथ ही कुछ अपने आपको पत्रकार बताने वाले ऐसे भी है जो खुद ठेकेदार से शराब लेकर दुसरे के माध्यम से गांव गांव शराब बिकवा रहे है वही कुछ तथाकथित पत्रकार ऐसे भी है जिनके पास न कोई भी पेपर की एजंसी है न ही कोई चैनल की आईडी फिर भी अपने आप को पत्रकार बता कर शराब ठेकेदार से रकम वसूली जा रही है इन पत्रकारों के द्वारा गांव गांव जाकर शराब बेचने वालों से भी पुलिस की धौस दे कर रकम बटोरी जा रही है ये तथाकथित पत्रकार कुछ पैसों ओर दारू की लालच की खातिर अपना ईमान बेचते ओर पत्रकारिता पर दाग लगाते नजर आ रहे है।

आखिर जनता अब भरोसा करे तो किस पर करे औऱ जाये तो जाए कहाँ ये लोगो के समझ के परे नजर आ रहा है।

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