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Thursday, May 7, 2020

डिंडोरी: भूखे प्यासे गुजरात से डिंडोरी पहुंचे 63 मजदूर, खुद जुटाया भाड़ा,

गुजरात से डिंडोरी पहुंचे 63 मजदूर, खुद जुटाया भाड़ा,


        गुजरात और एमपी सरकार ने नहीं की कोई व्यवस्था मकान मालिक ने किया बेघर मजदूर से किराया मांग कर परेशान कर रहा था मकान मालिक

तीन हजार रूपए प्रति मजदूर के हिसाब से बस का दिया किराया

बाहर फंसे मजदूरों से मनमाना किराया वसूल रहे है वाहन मालिक

          रेवांचल टाइम्स डिंडोरी, 7 मई 2020, आज सुबह गुजरात से मजदूरों से भरी एक बस डिंडोरी पहुंची जिसमें 63 लोग सवार थे, बस नगर में प्रवेश करने पर पुलिस द्वारा जानकारी दर्ज कर सभी सवारियों को चन्द्र विजय महाविद्यालय स्थित शिविर में भेजा गया जहां स्वास्थ परीक्षण हेतु 10 बजे तक मजदूर इंतजार करते रहे।


       मजदूरों ने बताया कि वे बिना कुछ खाए पिये दो दिनों से लगातार सफर करते हुए गुजरात से डिंडोरी पहुंचे है, रास्ते में कहीं भी उन्हें होटल और ढाबे खुले नहीं मिले जिससे वे भूखे प्यासे ही यात्रा करते रहे। उन्होंने जानकारी दी कि वे कपड़े के कारखानों में सूरत में काम करने गए थे जहां काम बंद होने के बाद वे वापस लौटने के लिए परेशान होते रहे बड़ी मुश्किल से उन्हें पास बनवाने में सफलता मिली और फिर वे किराए की बस करके सूरत से डिंडोरी पहुंचे है। इसमें सभी मजदूर डिंडोरी जिले के बताए जाते है उन्होंने बताया कि बस वाला प्रतियात्री 3000/- ले कर यहां तक लाने तैयार हुआ था किसी प्रकार की मदद उन्हें न तो गुजरात सरकार से मिली न ही एमपी सरकार ने कोई सहारा दिया इसमें से कुछ लोगो के पास पैसे भी नहीं थे उन्होंने अपने घर पर फोन करके पैसा खाते में डलवाया तब जा कर किराए का इंतजाम हुआ।

      शासन द्वारा बाहर फंसे मजदूरों को लाने की बात तो कर रही है पर मजदूर भूखे प्यास जहा फंसे है वहां उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। वही सुबह 6:00 बजे जब मजदूर पहुंचे तो न ही स्वास्थ्य विभाग का अमला वहां मौजूद था न ही किसी प्रकार की कोई व्यवस्था थी, गौरतलब है 3 घंटे कॉलेज तिराहे पर बैठकर मजदूर अपने गंतव्य तक पहुंचाए जाने का इंतजार कर रहे थे।
        इसी बीच आज सुबह महाराष्ट्र से भी कुछ मजदूर डिंडोरी पहुंचे वहीं रीवा से जिला प्रशासन द्वारा भेजी गई बस द्वारा 17 मजदूर डिंडोरी पहुंचे जो अपना स्वास्थ परीक्षण करवा के आगे अपने घर की ओर जाने के लिए प्रशासन द्वारा व्यवस्था किए जाने का इंतजार करते रहे। वही  भूख से  व्याकुल  मजदूरों को जिले की महिला पत्रकार नाज़नीन पठान द्वारा सभी मजदूरों को फल व बिस्किट खिलाकर  मजदूरों की मदद की ये मिसाल है इनसानियत की मानव सेवा ही माधव सेवा है।

रेवांचल टाइम्स से अविनाश टांडिया डिंडोरी की रिपोर्ट

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