सहायक आयुक्त मंडला अरुण शुक्ला पहुँचे अपने मूल विभाग पशु चिकित्सालय, जनजाति शिक्षा विभाग में होगी नई पदस्थापना
दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला। जिले में सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विकास विभाग में पशु पालन विभाग से सहायक आयुक्त के पद पर नियुक्ति हुई अरुण शुक्ला को अब अपने मूल पद पर वापस होना पड़ा रहा है जहाँ अब उन्हें शिक्षा व्यवस्था छोड़ पशुपालन विभाग में अपनी सेवायें देना पड़ेगा, वही इनका आदेश विधानसभा से आदेश जारी हुआ।
वही जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में मऊगंज विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक प्रदीप पटेल द्वारा उठाए गए एक महत्वपूर्ण तारांकित प्रश्न का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग के पशु चिकित्सकों को अन्य विभागों में प्रतिनियुक्त किए जाने का मुद्दा सदन में उठने के बाद सरकार ने इस पर गंभीरता से विचार करते हुए संबंधित अधिकारियों को उनके मूल विभाग में वापस भेजने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।
इसी क्रम में मंडला के सहायक आयुक्त, आदिम जाति कल्याण विभाग अरुण शुक्ला को भी उनके मूल विभाग पशुपालन एवं डेयरी विभाग में वापस भेज दिया गया है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार ने विभागीय आवश्यकता और विधानसभा में उठे प्रश्न को गंभीरता से लिया है।
विधानसभा में विधायक प्रदीप पटेल ने प्रश्न क्रमांक 32763 के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया था कि जब प्रदेश में पशु चिकित्सकों की पहले से ही कमी है, तब उन्हें प्रतिनियुक्ति पर अन्य विभागों में क्यों भेजा गया। उन्होंने विशेष रूप से अरुण शुक्ला तथा कमलेश कुमार पाण्डेय जैसे पशु चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति का मामला उठाते हुए नियमों और विभागीय आवश्यकता पर प्रश्न खड़े किए थे।
वही सरकार द्वारा इस विषय की समीक्षा के बाद संबंधित अधिकारियों को मूल विभाग में वापस भेजने का निर्णय लिया गया। इससे पशुपालन विभाग में चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी और पशुपालकों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। वहीं, मंडला के आदिम जाति कल्याण विभाग में अब नए अधिकारी की पदस्थापना की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
यह निर्णय इस बात का उदाहरण है कि विधानसभा में जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाए जाने पर शासन स्तर पर सकारात्मक कार्रवाई संभव है। विधायक प्रदीप पटेल द्वारा उठाया गया यह प्रश्न न केवल विभागीय व्यवस्था को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ, बल्कि शासन की जवाबदेही को भी मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।

