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किसान संघर्ष समिति बिजली की समस्या को लेकर पहुंचे अधीक्षण यंत्री के पास




 



दैनिक रेवांचल टाइम्स  - बम्हनी  हवेली किसान संघर्ष समिति लगभग 10 गाँव लफरा,सिलगी,खारी,देवगांव,भडिया,भौरताल,धुतका,मलारा कटंगा टोला के सैकड़ों किसानों ने अधीक्षण यंत्री मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण मंडला से मिलकर बिजली कटौती और कटौती का सेड्यूल से होने वाली फसल को नुकसान एवं कृषक पर हो रही अमानवीय परेशानियों से अवगत कराया किसानों की समस्या बिजली कटौती से तो है ही परन्तु उससे अधिक बिजली कटौती के समय से भी है एक ओर सरकार कृषकों की हितैषी बनती है वहीं दूसरी तरफ किसानों की समस्या को सुनने और हल करने के अधिकार आला अधिकारियों को नहीं देती है बम्हनी विद्युत वितरण केन्द्र में एक मात्र लफरा फीडर पर 14 घंटे की कटौती जारी है 24 घंटे में से सिर्फ 10 घंटे ही थ्री फेस बिजली कृषकों को मिल रही है जो कृषि कार्यो के लिए नहीं के बराबर है फसल उगाने के लिए बिजली का महती आवश्यकता होती है पर्याप्त बिजली न मिलने से उपज पैदा करने और गन्ने से गुड़ बनाने में किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है किसानों के अनुसार बिजली विभाग की मनमानी इस तरह है जो मानवीय दृष्टिकोण से भी सही नहीं है कृषक के साथ अमानवीयता जैसा व्यवहार सरकारी फरमानों का हवाला बता कर विभाग कर रहा है एक ओर मात्र 10 घंटे थ्री फेस बिजली वहीं दूसरी ओर कटौती का सेडूल्य जो दिन में 6 घंटे और मध्य रात्रि तक 4 घंटे जिसमें दिन का समय तो कुछ हद तक ठीक है परन्तु रात्रि का समय किसी भी तरह से सही नहीं है जब लोग कड़कड़ाती ठंड में घरों में दुवकते हैं तब अन्नदाता खेतों में सिंचाई और गुड़ बनाने का काम करते हैं जिससे किसानों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ना स्वाभाविक है आखिर कृषकों के हित की बात करने वाली सरकार कृषकों के साथ अमानवीय जैसा व्यवहार कैसे कर सकती है थ्री फेस 10 घंटे बिजली से जहाँ किसान परेशान हैं वहीं दूसरी तरफ आम जनों को भी पीने के पानी की किल्लत हो रही है बड़े गाँव कस्बे में नल जल से आपूर्ति प्रभावित हो रही है किसानों की ब्यथा पर अधीक्षण यंत्री के के सोनवाने ने हाथ खड़े कर दिया और एक सीधा सा जबाब दे दिया शासन के दिशा निर्देश से हट कर हमें कोई संशोधन करने का अधिकार नहीं है यह शासन स्तर का विषय है यदि कुछ हो भी सकता है तो एमडी जबलपुर ही कर सकते हैं अब किसान अपनी समस्या सुनाने भोपाल दिल्ली तो जा नहीं सकते हैं मतलब साफ है जो हो रहा है उसे आम लोग बर्दाश्त करते रहें अधीक्षण यंत्री व्दारा मदद के तौर पर किसानों के आवेदन को सेड्यूल संशोधन के लिए प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजने की बात बोली गई मांग पर निर्णय लेना न लेना उन अधिकारियों पर है जिन्हें मैदानी रुप से किसानों की समस्या से कोई लेना देना नहीं है खैर जो भी हो उच्चाधिकारियों को कृषकों की मांग पर सहानुभूतिपूर्ण निर्णय समय पर ले लेना चाहिए ऐसा न हो कृषकों की सहनशीलता खत्म हो जायें और कोई बड़ा आंदोलन के लिए मजबूर हो जायें समिति अध्यक्ष हेमंत पटैल के साथ दशरथ चंद्रौल,राधे लाल धनगर,संतोष चंद्रौल,टेकचंद धनगर,राजेश्वर पटैल,भागचंद्र पटैल,नथ्थू पटैल,संजय तिवारी,चंद्रेश्वर पटैल,सुनील हरदहा,वेद प्रकाश पटैल,बद्री पटैल,रंजीत पटैल,स्नेह पटैल,विदेश पटैल,राम कुमार केवट,अम्मा लाल हरदहा,संत राम उइके,राजीव चंद्रौल,रमाकांत पटैल,सौरभ पटैल,सियाराम पटैल,संजय धनगर,विपिन पटैल,मनोज पटैल,छवि लाल पटैल,महेश पटैल रमेश,सैयाम,राजेन्द्र हरदहा,वीरन परतें,प्रकाश चंद्रौल,राजेन्द्र तेकाम,राम प्रसाद,कृष्ण कुमार पटैल,राजाराम,श्याम,दुर्गेश पटैल,खुमान सहित बड़ी संख्या में कृषक उपस्थित रहें



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